भारत की कृषि में बड़ा बदलाव: अब किसान की आय और हरियाली पर फोकस, एग्री-टेक सेक्टर में बहार!

AGRICULTURE
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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
भारत की कृषि में बड़ा बदलाव: अब किसान की आय और हरियाली पर फोकस, एग्री-टेक सेक्टर में बहार!
Overview

भारत का कृषि अनुसंधान (Agricultural Research) अब सिर्फ खाद्य सुरक्षा (Food Security) तक सीमित नहीं रहा। देश ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए किसानों की आय बढ़ाने और पर्यावरण की स्थिरता (Sustainability) को दोहरे लक्ष्य के तौर पर अपनाया है। इस बड़े बदलाव की वजह से एग्री-टेक (Agri-tech) सेक्टर में भारी निवेश और नई खोजें हो रही हैं।

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'किसान की जेब भरे और धरती हरी-भरी रहे' – नया मिशन

हरित क्रांति (Green Revolution) के दिनों को पीछे छोड़ते हुए, भारत का कृषि अनुसंधान अब 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य पर आगे बढ़ रहा है। अब मुख्य जोर राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ किसानों की आमदनी बढ़ाने और पर्यावरण को सुरक्षित रखते हुए टिकाऊ (Sustainable) तरीके से खेती करने पर है। चावल और मक्के जैसी फसलों में सरप्लस (Surplus) बताता है कि हम कमी के दौर से निकल चुके हैं। किसान भी अब सिर्फ गुजर-बसर करने के बजाय, अपनी खेती को एक बिज़नेस की तरह देख रहे हैं। इसके लिए ऐसे रिसर्च सिस्टम की ज़रूरत है जो साइंटिफिकली एडवांस्ड हो, किसान-केंद्रित हो और असल दुनिया की समस्याओं व आर्थिक व्यवहार्यता (Economic Feasibility) पर ध्यान दे। इस बदलाव में एग्री-टेक सेक्टर का रोल बहुत अहम है, जिसके अगले कुछ सालों में $24 बिलियन तक पहुँचने का अनुमान है।

एग्री-टेक में तेज़ी: इनोवेशन और निवेश की बाढ़

जलवायु परिवर्तन (Climate Change), किसानों की समृद्धि की चाहत और नई टेक्नोलॉजी, इन सबने मिलकर एग्री-टेक में इनोवेशन (Innovation) और निवेश को ज़बरदस्त रफ़्तार दी है। भारतीय एग्री-टेक मार्केट के $878.1 मिलियन तक पहुँचने का अनुमान है। खासकर AI-पावर्ड प्रीसिजन फार्मिंग (Precision Farming), IoT सेंसर और डिजिटल मार्केटप्लेस (Digital Marketplaces) में बड़ी ग्रोथ देखी जा रही है। पैसा क्लाइमेट-रेज़िलिएंट फसलें (Climate-resilient crops), सस्टेनेबल फार्मिंग मैटेरियल और रीजेनरेटिव एग्रीकल्चर (Regenerative Agriculture) के तरीकों में लग रहा है। 'डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन' और 'एग्रीस्टैक' (AgriStack) जैसे सरकारी प्रोग्राम्स डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रहे हैं और नई टेक्नोलॉजी अपनाने के लिए सपोर्टिव माहौल बना रहे हैं। हालाँकि FY23 में एग्री-टेक फंडिंग थोड़ी घटी थी, लेकिन इन्वेस्टर्स का भरोसा लौट रहा है, ख़ासकर ऐसे बिज़नेस मॉडल्स पर जो बड़े पैमाने पर काम कर सकें और मुनाफे वाले हों। किसान भी डिजिटल पेमेंट, फॉर्मल लोन और ऑर्गेनिक प्रोडक्ट अपनाने में ज़्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

ग्लोबल R&D में भारत की पोजीशन

पब्लिक एग्रीकल्चरल रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) खर्च के मामले में भारत दुनिया में चौथे नंबर पर है, अमेरिका, जापान और चीन के बाद। लेकिन, एग्रीकल्चरल आउटपुट वैल्यू के प्रतिशत के हिसाब से देखें तो, भारत का R&D खर्च (2019-21 में 0.3%) ब्राज़ील (0.9%), अमेरिका (0.7%) और चीन (0.4%) जैसे बड़े एग्रीकल्चरल देशों से कम है। विकसित देशों के मुकाबले भी भारत का यह खर्च कम है, जो एडवांस्ड टेक्नोलॉजी अपनाने की रफ़्तार को धीमा कर सकता है। इन खर्चों के अंतर के बावजूद, भारतीय कृषि विज्ञान संस्थानों को इंटरनेशनल पहचान मिल रही है। ICAR (Indian Council of Agricultural Research) के संस्थान जैसे इंडियन वेटेरिनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (IVRI) और इंडियन एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट (IARI) ने QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स में वेटरनरी साइंस और एग्रीकल्चर & फॉरेस्ट्री कैटेगरी में जगह बनाई है। यह बेसिक और अप्लाइड साइंस में तरक्की, लैब से खेत तक जुड़ने वाले रिसर्च और किसानों की मदद व क्लाइमेट-रेज़िलिएंट फार्मिंग के लिए किए जा रहे संयुक्त प्रयासों को दिखाता है।

अभी भी हैं रुकावटें: अपनाने में दिक्कतें और फंडिंग गैप्स

नई खोजों और निवेश के बावजूद, टेक्नोलॉजी को किसानों तक पहुँचाने (Adoption) में बड़ी अड़चनें हैं। छोटे, बिखरे हुए खेत और किसानों के बीच कम डिजिटल लिटरेसी (Digital Literacy) बड़ी चुनौतियाँ हैं। भारत की विविध खेती के लिए कस्टमाइज़्ड समाधान (Customized Solutions) की ज़रूरत होती है, जिससे टेक्नोलॉजी को तेज़ी से फैलाना मुश्किल हो जाता है। एग्री-टेक में निवेश भले ही मज़बूत रहा हो, लेकिन FY23 में ग्लोबल फंडिंग में आई गिरावट ने मार्केट की अस्थिरता (Volatility) दिखाई। अब इन्वेस्टर्स ज़्यादा सतर्क हैं और स्केलेबिलिटी (Scalability) व प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) पर ज़्यादा ध्यान दे रहे हैं। एग्रीकल्चरल आउटपुट के मुकाबले भारत का R&D खर्च, भले ही संस्थागत रैंकिंग्स में सुधर रहा हो, लेकिन रिसोर्सेज को बेहतर ढंग से अलॉट करने और प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी से गैप्स को भरने की ज़रूरत है ताकि टेक्नोलॉजी को सफलतापूर्वक अपनाया जा सके। मॉनसून पर निर्भरता, क्लाइमेट-रेज़िलिएंट फार्मिंग पर रिसर्च के बावजूद, एक बड़ी कमजोरी बनी हुई है।

भविष्य की राह: टेक्नोलॉजी को किसानों और पॉलिसी से जोड़ना

भारत के कृषि भविष्य की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि नई टेक्नोलॉजी को किसानों की ज़रूरतों और सस्टेनेबिलिटी के लक्ष्यों से कैसे जोड़ा जाता है। क्लाइमेट चेंज के प्रति अनुकूलन (Adaptation) और कमी (Mitigation) रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) का मुख्य हिस्सा है, क्योंकि भारत ने ग्रीनहाउस गैस (GHG) उत्सर्जन (Emission) में बड़ी कमी लाने के लक्ष्य रखे हैं। इस रणनीति में रिसोर्स का एफिशिएंट इस्तेमाल, फलों और सब्जियों जैसी ज़्यादा वैल्यू वाली फसलें उगाना, और पशुधन व उपज के लिए सप्लाई चेन को बेहतर बनाना शामिल है। एनालिस्ट्स (Analysts) का अनुमान है कि AI और स्मार्ट फार्मिंग (Smart Farming) का विकास जारी रहेगा, जिसे सरकारी नीतियों और स्टार्टअप्स के बढ़ते इकोसिस्टम का सहारा मिलेगा। फार्म सपोर्ट सर्विसेज को बेहतर बनाना और टेक्नोलॉजी को टेस्ट करने व शेयर करने के लिए जॉइंट प्लेटफॉर्म बनाना, भारत के एग्रीकल्चरल ट्रांसफॉर्मेशन की पूरी क्षमता को साकार करने के लिए अहम होगा।

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