भारतीय पोल्ट्री एक्सपोर्टर्स के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है। UAE के लिए शिपिंग कंटेनर का किराया **$1,900** से बढ़कर सीधे **$9,000** के स्तर पर पहुंच गया है। निर्यात में आई गिरावट और तुर्की से मिल रही कड़ी टक्कर के बीच अब सेक्टर सरकार से मदद की गुहार लगा रहा है।
तमिलनाडु के नामक्कल-इरोड क्षेत्र, जहां से भारत का लगभग 99% अंडा निर्यात होता है, वहां के एक्सपोर्टर्स इन दिनों भारी संकट से जूझ रहे हैं। शिपिंग लागत में हुई 4 गुना बढ़ोतरी ने बिजनेस की कमर तोड़ दी है। एक कंटेनर का किराया जो पहले $1,900 था, वह अब $9,000 तक पहुंच चुका है, जिससे मुनाफे (Margins) पर सीधा असर पड़ा है।
निर्यात में भारी सुस्ती
एक्सपोर्ट वॉल्यूम अभी भी अप्रैल-मई की बाधाओं से उबरने की कोशिश कर रहा है। फिलहाल निर्यात अपने ऐतिहासिक स्तर के केवल 50% से 55% पर ही पहुंच पाया है। पोल्ट्री उत्पादों की सीमित शेल्फ-लाइफ और कीमतों के प्रति संवेदनशीलता के कारण, इतनी महंगी शिपिंग के बाद इंटरनेशनल मार्केट में भारतीय माल की कीमत प्रतिस्पर्धी नहीं रह पा रही है।
तुर्की से बढ़ती चुनौती
इस मुश्किल समय में तुर्की के पोल्ट्री एक्सपोर्टर्स का बढ़ता दबदबा भारतीय कारोबारियों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। तुर्की के एक्सपोर्टर्स कम कीमत पर माल सप्लाई कर रहे हैं, जिससे मिडिल ईस्ट के बाजारों में भारत की हिस्सेदारी लगातार घट रही है।
घरेलू मार्केट पर क्या होगा असर?
अगर एक्सपोर्ट की यही स्थिति रही, तो घरेलू मार्केट में पोल्ट्री उत्पादों की सप्लाई बढ़ सकती है। सप्लाई अधिक होने से अंडे और चिकन की कीमतों में भारी गिरावट आ सकती है, जिसका सीधा नुकसान देश के हजारों पोल्ट्री किसानों को उठाना पड़ सकता है।
सरकार से उम्मीदें
ऑल इंडिया पोल्ट्री प्रोडक्ट एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ने चिंता जताई है कि बिना सरकारी हस्तक्षेप के भारतीय पोल्ट्री अपनी ग्लोबल पहचान खो सकता है। इंडस्ट्री अब शिपिंग लाइनों के साथ बातचीत, लॉजिस्टिकल सब्सिडी और ट्रांजिट लागत को कम करने के लिए सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग कर रही है।
