Indian Egg Prices: ₹9 प्रति अंडा! बढ़ती लागत के कारण रिकॉर्ड तोड़ महंगाई

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AuthorAditya Rao|Published at:
Indian Egg Prices: ₹9 प्रति अंडा! बढ़ती लागत के कारण रिकॉर्ड तोड़ महंगाई

भारत में अंडे की कीमतों ने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं, खुदरा दाम ₹9 प्रति अंडे तक पहुंच गए हैं। इस भारी उछाल की मुख्य वजह पोल्ट्री फीड के प्रमुख घटक, मक्का (Maize) और सोयाबीन मील (Soybean Meal) की लागत में जबरदस्त वृद्धि है। उत्पादकों का मुनाफा दबाव में है।

अंडे की कीमतों में क्यों आया इतना उछाल?

भारत में अंडे की कीमतें अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गई हैं। फार्म से निकले अंडे करीब ₹7 प्रति यूनिट बिक रहे हैं, वहीं खुदरा बाजारों में यह ₹8.5 से ₹9 तक पहुंच गए हैं। पोल्ट्री सेक्टर इस वक्त फीड की बढ़ती कीमतों के भारी दबाव का सामना कर रहा है, जो उत्पादन लागत का एक बड़ा हिस्सा हैं।

फीड की महंगाई और मार्जिन पर असर

पोल्ट्री कारोबार का मुनाफा सीधे तौर पर फीड की लागत से जुड़ा होता है, जिसमें मुख्य रूप से मक्का (Maize) और सोयाबीन मील (Soybean Meal) का इस्तेमाल होता है। इंडस्ट्री के आंकड़ों के अनुसार, मार्च के बाद से मक्के की कीमतों में 35% से अधिक का इजाफा हुआ है, जबकि सोयाबीन मील की कीमतें 64% से ज्यादा बढ़ी हैं। ये दोनों घटक कुल फीड मिक्स का लगभग 77% हिस्सा बनाते हैं। लागत में यह बढ़ोतरी वेस्ट एशिया में सप्लाई चेन की बाधाओं और इथेनॉल इंडस्ट्री द्वारा मक्के की बढ़ी हुई मांग का मिलाजुला नतीजा है, जिससे स्थानीय उपलब्धता कम हो गई है।

मॉनसून और फसल की पैदावार का प्रभाव

यह सेक्टर भविष्य में कच्चे माल की उपलब्धता को लेकर भी चिंतित है। मॉनसून के अनियमित पैटर्न ने खरीफ और रबी फसलों की पैदावार को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। हालिया रिपोर्टों से पता चलता है कि घरेलू सोयाबीन उत्पादन पहले से ही सामान्य स्तर से 20% कम था, जिससे सप्लाई-डिमांड में असंतुलन पैदा हो गया है। द सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन (The Solvent Extractors' Association) ने बुवाई में देरी और रकबे में कमी जैसे जोखिमों पर भी प्रकाश डाला है, जो तिलहन की सप्लाई को और सीमित कर सकते हैं। मॉनसून सीजन में किसी भी कमी से फीड की कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं, जिससे उत्पादकों की स्थिर मुनाफा बनाए रखने की क्षमता पर सवाल खड़े हो सकते हैं।

ब्रॉयलर मार्केट और मौसमी मांग

अंडों के अलावा, पोल्ट्री सेक्टर मांस की कीमतों में भी वृद्धि देख रहा है, जिसमें खुदरा चिकन की दरें लगभग ₹250 से ₹260 प्रति किलो चल रही हैं। जून तक चली भीषण गर्मी की लहर ने ब्रॉयलर चिकन के उत्पादन को बाधित किया, जिससे कुल सप्लाई कम हो गई। हालांकि इंडस्ट्री विश्लेषकों को उम्मीद है कि उत्तरी भारत में श्रावण महीने के दौरान मांग ऐतिहासिक रूप से कम होने के कारण अंडों की कीमतों में कुछ नरमी आएगी, लेकिन फीड की संरचनात्मक लागत एक स्थायी समस्या बनी हुई है।

निवेशकों के लिए, मुख्य चिंता का विषय इन मूल्य वृद्धि की स्थिरता है। जो उत्पादक फीड इन्फ्लेशन का पूरा बोझ उपभोक्ताओं पर डालने में असमर्थ होंगे, वे अपने ऑपरेटिंग मार्जिन पर दबाव का सामना कर सकते हैं। आने वाली तिमाहियों में सेक्टर के प्रदर्शन को समझने के लिए मॉनसून की प्रगति, घरेलू फसल उत्पादन और इथेनॉल सम्मिश्रण तथा मक्के के उपयोग से संबंधित किसी भी सरकारी नीति में संभावित बदलावों पर भविष्य के अपडेट महत्वपूर्ण होंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.