खेती में क्रांति! भारत इस सर्दी में लॉन्च करेगा दुनिया का पहला जीन-एडिटेड चावल

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
खेती में क्रांति! भारत इस सर्दी में लॉन्च करेगा दुनिया का पहला जीन-एडिटेड चावल

भारत इस सर्दी में 'पुसा डी एस टी राइस 1' (Pusa DST Rice 1) के बीज तैयार करना शुरू करेगा। यह एक जीन-एडिटेड किस्म है जिसे सूखा और खारे पानी को बेहतर ढंग से झेलने के लिए डिज़ाइन किया गया है। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) ने CRISPR तकनीक का इस्तेमाल करके इसे विकसित किया है, ताकि मुश्किल परिस्थितियों में भी फसल की पैदावार बढ़ाई जा सके। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) अब Corteva के साथ टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप को अंतिम रूप दे रहा है ताकि इसे व्यावसायिक रूप से बाजार में लाया जा सके।

खेती में आ रहा बड़ा बदलाव

भारत अब कृषि तकनीक में एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। आने वाली रबी सीजन में देश पहली बार अपने जीन-एडिटेड चावल की किस्मों के बीज तैयार करना शुरू करेगा। इस पहल का मुख्य केंद्र 'पुसा डी एस टी राइस 1' (Pusa DST Rice 1) किस्म है, जिसे नई दिल्ली के भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) ने विकसित किया है। इस प्रोजेक्ट का मकसद ऐसी फसलें तैयार करना है जो सूखे और खारे पानी जैसी गंभीर समस्याओं का बेहतर सामना कर सकें।

CRISPR तकनीक से फसलें होंगी और मज़बूत

'पुसा डी एस टी राइस 1' किस्म को Drought and Salt Tolerance जीन में बदलाव करके, खास तौर पर SDNI म्यूटेंट को टारगेट करके बनाया गया है। इस तकनीकी सुधार से चावल के पौधे मुश्किल पर्यावरणीय हालातों में भी ज़्यादा भरोसेमंद प्रदर्शन कर पाएंगे। 2023 और 2024 में किए गए फील्ड ट्रायल के नतीजों से पता चला है कि तटीय इलाकों के खारे पानी में इस किस्म ने औसतन 2,493 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की पैदावार दी। वहीं, इसी तरह की परिस्थितियों में बेस किस्म MTU1010 ने 1,912 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की पैदावार दर्ज की। ये नतीजे बताते हैं कि खारे या सूखे से प्रभावित इलाकों के किसानों के लिए पैदावार बढ़ने की अच्छी संभावना है।

'पुसा डी एस टी राइस 1' के अलावा, हैदराबाद के भारतीय चावल अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने CRISPR-CaS12a टूल का उपयोग करके 'DRR Dhan 100' (KAMALA) नाम की एक और किस्म विकसित की है। सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता को बढ़ावा देने के लिए इन नवाचारों को प्राथमिकता दी है।

रेगुलेटरी फ्रेमवर्क और टेक्नोलॉजी लाइसेंसिंग

इस लॉन्च का एक अहम हिस्सा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और Corteva के बीच फाइनल हो रहा समझौता है। Corteva एक ग्लोबल कंपनी है जिसके पास CRISPR-Cas9 जीन-एडिटिंग तकनीक के लाइसेंस हैं। इस तरह के इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी एग्रीमेंट नई बीज किस्मों को व्यावसायिक रूप से बड़े पैमाने पर लाने के लिए ज़रूरी हैं। रेगुलेटरी नज़रिए से, भारत इन उत्पादों के लिए एक स्पष्ट रास्ता अपना रहा है। पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत, साइट डायरेक्टेड न्यूक्लियस (SDN 1 और SDN 2) तरीकों से विकसित उत्पादों को कुछ बायोसेफ्टी प्रतिबंधों से मुक्त माना जाता है। ये तरीके पौधों के मौजूदा जीन्स को बेहतर बनाने का काम करते हैं, ताकि अंतिम उत्पाद प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाली किस्मों जैसा हो।

ICAR नवंबर में बुवाई के लिए तैयारी कर रहा है और उसने 'पुसा डी एस टी राइस 1' के लगभग 2 टन बीज सुरक्षित कर लिए हैं। निवेशकों और कृषि क्षेत्र के लिए अगला कदम शुरुआती बीज गुणन (seed multiplication) चरण की सफलता और ग्लोबल लाइसेंसर के साथ हुए औपचारिक टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप की प्रगति पर नज़र रखना होगा। जब ये जीन-एडिटेड उत्पाद व्यावसायिक आपूर्ति श्रृंखला में प्रवेश करेंगे, तो घरेलू बीज बाजार पर इसका दीर्घकालिक प्रभाव और छोटे किसानों द्वारा इसे अपनाने की दर भी महत्वपूर्ण कारक होंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.