फसल पर मौसम की मार
व्यापारिक सूत्रों के अनुसार, देश की गेहूं की फसल पिछले साल के रिकॉर्ड स्तर से 5% से 10% तक गिर सकती है। यह सरकारी अनुमान के बिल्कुल विपरीत है, जिसने पहले बंपर फसल की उम्मीद जताई थी।
फसल को यह नुकसान कटाई से ठीक पहले, यानी कुछ हफ्ते पहले हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के कारण हुआ है। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान जैसे प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में इसका सबसे ज्यादा असर देखा गया है।
सरकारी स्टॉक से बाजार में स्थिरता
Olam Agri India के डिप्टी कंट्री हेड, नितिन गुप्ता ने बताया कि शुरुआत में फसल अच्छी दिख रही थी, लेकिन कटाई से पहले के खराब मौसम ने पैदावार को काफी प्रभावित किया।
हालांकि, अच्छी बात यह है कि पिछले चार सालों की तरह इस बार भी सरकारी एजेंसियों की खरीद में संभावित कमी से बाजार में कमी (shortage) आने की उम्मीद कम है। केंद्र सरकार के पास अनाज का भंडार (grain reserves) अनिवार्य स्तर से लगभग तीन गुना ज्यादा है, जो घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त है।
एक्सपोर्ट की राह खुली
अप्रैल की शुरुआत में सरकारी गेहूं का स्टॉक 21.8 मिलियन टन तक पहुंच गया था, जो पिछले साल की तुलना में 85% ज्यादा है और पिछले पांच सालों का सबसे बड़ा आंकड़ा है।
इस मजबूत स्टॉक पोजीशन के चलते सरकार ने 2.5 मिलियन टन और गेहूं के एक्सपोर्ट (export) की मंजूरी दे दी है, जिससे कुल कोटा बढ़कर 5 मिलियन टन हो गया है।
सरकारी एजेंसियां 30.3 मिलियन टन की खरीद का लक्ष्य लेकर चल रही हैं, लेकिन शुरुआती खरीद थोड़ी धीमी रही है। इस कारण गुणवत्ता मानकों में थोड़ी ढील दी गई है। फिलहाल, ट्रेडर्स का अनुमान है कि वास्तविक खरीद 26 मिलियन से 28 मिलियन टन के बीच रह सकती है।
