Paraquat Ban India: सेहत के लिए खतरा, एग्रोकेमिकल कंपनियों पर मंडराया संकट!

AGRICULTURE
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AuthorNeha Patil|Published at:
Paraquat Ban India: सेहत के लिए खतरा, एग्रोकेमिकल कंपनियों पर मंडराया संकट!
Overview

भारत में पैराक्वैट डाईक्लोराइड (paraquat dichloride) नाम के केमिकल वाले कीटनाशक पर बैन लग सकता है। इस केमिकल से सेहत को होने वाले गंभीर खतरों की वजह से देश भर में इसे प्रतिबंधित करने की मांग तेज हो गई है। तेलंगाना सरकार पहले ही इस पर रोक लगा चुकी है।

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सेहत पर गंभीर खतरे, मंडरा रहा है बैन का साया

पैराक्वैट डाईक्लोराइड (paraquat dichloride) नाम के शाकनाशी (herbicide) के इस्तेमाल से किडनी फेलियर, फेफड़ों में फाइब्रोसिस और पार्किंसंस जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। इसी वजह से भारत में इस पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का दबाव लगातार बढ़ रहा है। हालांकि, तेलंगाना जैसे राज्य पहले ही इसे बैन कर चुके हैं, लेकिन केंद्र सरकार की ओर से इस दिशा में कोई बड़ा कदम उठाना बाकी है।

Pesticides Management Bill 2025: उम्मीदें और कमियां

सरकार ने कीटनाशक नियमों को अपडेट करने के लिए 'Pesticides Management Bill, 2025' पेश करने की योजना बनाई है, जो 1968 के Insecticides Act की जगह लेगा। फरवरी 2026 तक इसके कानून बनने की उम्मीद है। लेकिन, आलोचकों का कहना है कि इस ड्राफ्ट में भी बड़े सुधार की जरूरत है। इसमें निर्माताओं की जवाबदेही (manufacturer liability) और राज्यों को मिलने वाली शक्तियों को लेकर स्पष्टता की कमी है। नियमों में ढील के कारण, सुरक्षित विकल्प मौजूद होने के बावजूद, किसान, मजदूर और पर्यावरण अभी भी खतरनाक रसायनों के संपर्क में आ रहे हैं। भारत पहले भी 27 खतरनाक केमिकल्स को बैन कर चुका है, लेकिन कई पुराने कीटनाशक जो काफी पहले मंजूर हुए थे, वे अभी भी इस्तेमाल हो रहे हैं।

बाजार में बदलाव, सुरक्षित विकल्पों की मांग बढ़ी

खेती की बढ़ती लागत, अनिश्चित मानसून, कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग की जरूरतें और मजदूरों की कमी के चलते कीटनाशकों का इस्तेमाल बढ़ा है। फसल की पैदावार में होने वाले 15% से 30% के नुकसान को रोकने के लिए खरपतवार नियंत्रण बहुत जरूरी है। भारत से हर्बिसाइड के एक्सपोर्ट में फाइनेंशियल ईयर 2020 से 2025 के बीच 20% की सालाना ग्रोथ दर्ज की गई है। भारतीय एग्रोकेमिकल मार्केट का वैल्यूएशन 2025 में करीब 9 अरब डॉलर था, जो 2030 तक 13 अरब डॉलर को पार करने का अनुमान है। क्रॉप प्रोटेक्शन केमिकल्स में 2031 तक 10% से अधिक की सालाना ग्रोथ की उम्मीद है।

टिकाऊ खेती की ओर झुकाव

अब किसान मैकेनिकल, बायोलॉजिकल और केमिकल तरीकों के मिले-जुले 'इंटीग्रेटेड वीड मैनेजमेंट' (Integrated Weed Management) पर जोर दे रहे हैं। फसल चक्र (crop rotation), मल्चिंग (mulching) और मशीनों से निराई-गुड़ाई (mechanical weeding) जैसे तरीके पैराक्वैट जैसे खतरनाक केमिकल्स पर निर्भरता कम कर सकते हैं। मिलेट्स (millets) और दालों (pulses) जैसी फसलों की खेती भी मिट्टी के स्वास्थ्य को बेहतर बनाती है। ग्लाइफोसेट (glyphosate) और ग्लुफोसिनेट अमोनियम (glufosinate ammonium) जैसे कुछ अन्य केमिकल विकल्प मौजूद हैं, लेकिन उनमें भी अपने जोखिम हैं।

प्रमुख एग्रोकेमिकल कंपनियां और उनका भविष्य

UPL Ltd., PI Industries और Rallis India जैसी बड़ी भारतीय एग्रोकेमिकल कंपनियों पर अब ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। यह सेक्टर 2026 में लगभग 9.59 अरब डॉलर का था और 2031 तक इसके 13.25 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। UPL Ltd. की मार्केट कैप करीब ₹56,500 करोड़ है और इसका P/E रेश्यो लगभग 25-29 के बीच है। PI Industries की मार्केट कैप लगभग ₹46,500 करोड़ है, जिसका P/E रेश्यो करीब 32 है। मिड-कैप कंपनी Rallis India की मार्केट कैप लगभग ₹5,200 करोड़ है और इसका P/E रेश्यो करीब 28 है। Rain Bio Tech Industries और Eagle Plant Protect Pvt. Ltd. जैसी कंपनियां पैराक्वैट बनाती हैं, और ये कंपनियां रेगुलेटरी चुनौतियों का सामना कर सकती हैं।

रेगुलेटरी बाधाएं और अनिश्चितता

'Pesticides Management Bill, 2025' में देरी और उसकी कमजोरियों के कारण नीतिगत अनिश्चितता बनी हुई है। राज्यों को कम अधिकार, निर्माताओं पर केस दर्ज करने में ढील, और केमिकल के इस्तेमाल के बाद समीक्षा का अभाव, ये सब मिलकर जोखिम बढ़ा रहे हैं। इसके अलावा, नकली और घटिया कीटनाशकों का बाजार में मिलना भी जोखिम को और बढ़ाता है। जो कंपनियां पैराक्वैट जैसे पुराने केमिकल्स पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं, उन्हें रेगुलेशन सख्त होने या बाजार के बदलते रुख के कारण भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.