एलपीजी का विकल्प बनेगा इथेनॉल?
वैश्विक सप्लाई की अनिश्चितताओं और इम्पोर्ट पर बढ़ती निर्भरता के बीच, भारत सरकार अपनी एनर्जी सिक्योरिटी (Energy Security) को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाने पर विचार कर रही है। प्रस्ताव के तहत, देश में पैदा होने वाले इथेनॉल (Ethanol) के लगभग 1,000 करोड़ लीटर के बड़े सरप्लस को होटलों, रेस्टोरेंट्स और एयरपोर्ट्स जैसे कमर्शियल इस्तेमाल के लिए कुकिंग फ्यूल के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। यह कदम न सिर्फ एलपीजी आयात (LPG Import) को कम करेगा, बल्कि घरेलू कृषि उत्पादों की मांग को बढ़ाकर रूरल इकॉनमी (Rural Economy) को भी सहारा देगा।
लागत में बड़ी बचत, लेकिन एनर्जी कंटेंट कम
इथेनॉल को कुकिंग फ्यूल के तौर पर अपनाने का एक बड़ा कारण इसकी लागत है। हाइड्रस इथेनॉल, जिसे अतिरिक्त सुखाने की जरूरत नहीं होती, लगभग ₹70 प्रति किलोग्राम की लागत पर उपलब्ध है, जबकि कमर्शियल एलपीजी की कीमत लगभग ₹103 प्रति किलोग्राम है। हालांकि, इथेनॉल का एनर्जी कंटेंट (Energy Content) एलपीजी की तुलना में कम है (लगभग 7,100 कैलोरी/किलोग्राम बनाम 12,000 कैलोरी/किलोग्राम), यह कम एमिशन (Emission) के साथ जलता है, जिससे पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए यह बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। भारत की इथेनॉल उत्पादन क्षमता सालाना लगभग 2,000 करोड़ लीटर तक पहुंच गई है, जिसमें से लगभग 1,000 करोड़ लीटर पेट्रोल में 20 प्रतिशत ब्लेंडिंग गोल (E20) पूरा करने के बाद भी सरप्लस है।
तकनीकी और रेगुलेटरी मंजूरी का इंतजार
इस प्रस्ताव की टेक्निकल फिजिबिलिटी (Technical Feasibility), प्राइसिंग (Pricing), सेफ्टी स्टैंडर्ड्स (Safety Standards) और डिस्ट्रीब्यूशन (Distribution) जैसे अहम पहलुओं का मूल्यांकन करने के लिए पेट्रोलियम, रोड ट्रांसपोर्ट, हेवी इंडस्ट्रीज और खाद्य मंत्रालयों के प्रतिनिधियों वाली एक इंटर-मिनिस्टीरियल पैनल (Inter-ministerial Panel) समीक्षा करेगी। उद्योग जगत भी टेस्टिंग और नए स्टैंडर्ड्स बनाने में सहयोग के लिए तैयार है। यह कदम देश में क्लीनर और डोमेस्टिक फ्यूल्स (Domestic Fuels) की ओर बढ़ने की सरकार की मंशा को दर्शाता है, जैसा कि E20 पेट्रोल मैंडेट से भी स्पष्ट है।
चुनौतियाँ भी कम नहीं
इथेनॉल को कुकिंग फ्यूल के तौर पर पेश करने में कई चुनौतियाँ भी हैं। इसकी कम एनर्जी डेंसिटी (Energy Density) का मतलब है कि समान ऊर्जा के लिए ज्यादा मात्रा की आवश्यकता होगी, जिससे खाना पकाने के समय पर असर पड़ सकता है। इथेनॉल की ज्वलनशीलता (Flammability) और एलपीजी सिलेंडरों की तुलना में इसकी अलग स्टोरेज (Storage) की जरूरतें कड़े सेफ्टी रूल्स और पब्लिक एजुकेशन (Public Education) की मांग करती हैं। तरल इथेनॉल के लिए एक नया डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम खड़ा करने में बड़े इन्वेस्टमेंट और लॉजिस्टिक्स (Logistics) की जरूरत होगी। इसके अलावा, एलपीजी पर मिलने वाली भारी सब्सिडी (Subsidy) के चलते अनसब्सिडाइज्ड (Unsubsidized) इथेनॉल फिलहाल उपभोक्ताओं को कम प्रतिस्पर्धी लग सकता है। अतीत में, स्टोरेज और इस्तेमाल पर कड़े एक्साइज लॉज़ (Excise Laws) के कारण घरों में इथेनॉल के इस्तेमाल के प्रयास सफल नहीं हो पाए थे। वर्तमान में, वैश्विक अस्थिरता के कारण 19kg के कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत दिल्ली में ₹2,078.50 तक पहुंच गई है, जो मौजूदा आर्थिक दबाव को दर्शाता है।
भविष्य की राह: ऊर्जा विविधता की ओर कदम
कमर्शियल कुकिंग में इथेनॉल के इस्तेमाल की संभावना को तलाशना भारत के ऊर्जा स्रोतों को डाइवर्सिफाई (Diversify) करने और सेल्फ-सफिशिएंसी (Self-sufficiency) बढ़ाने के सक्रिय प्रयासों को दिखाता है। इस योजना की सफलता पैनल की रिपोर्ट, इंडस्ट्री की ओर से सुरक्षित और एफिशिएंट कुकिंग मेथड्स (Cooking Methods) विकसित करने की क्षमता और एक व्यावहारिक डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क (Distribution Network) बनाने पर निर्भर करेगी।
