IPL को मिले यूरिया सप्लाई ऑफर $1,000 प्रति मीट्रिक टन के आंकड़े को छू रहे हैं। यह हालिया टेन्डर्स के मुकाबले कहीं ज़्यादा है, जहाँ कीमतें $500-$512 प्रति टन के आसपास थीं। फिलहाल, भारत के पश्चिमी और पूर्वी तटों पर डिलीवरी के लिए $935 से $959 प्रति टन तक के बिड्स आए हैं, जो ग्लोबल फर्टिलाइजर मार्केट में बढ़ी कीमतों का संकेत दे रहे हैं। कुछ बिड्स तो $1,136 तक भी पहुंचे हैं।
इस भारी बढ़ोतरी की मुख्य वजह मिडिल ईस्ट में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है, जिसने प्रमुख ट्रेड रूट्स, खासकर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को बुरी तरह प्रभावित किया है। यह मार्ग ग्लोबल फर्टिलाइजर ट्रेड का लगभग एक-तिहाई हिस्सा संभालता है। इस संघर्ष ने मिडिल ईस्ट में ऊर्जा उत्पादन साइट्स और एक्सपोर्ट हब को नुकसान पहुंचाया है, जिससे सप्लाई और टाइट हो गई है। इसके अलावा, भारत में नेचुरल गैस (LNG) की सीमित उपलब्धता ने घरेलू यूरिया प्रोडक्शन को भी घटा दिया है। एशियाई LNG स्पॉट कार्गो की कीमत $18.45 प्रति MMBtu पर पहुंच गई है, जो 24 घंटे में 2.4% बढ़ी है।
भारत के इन ऊंचे दामों पर खरीदारी के फैसले का असर देश की सीमाओं से कहीं बाहर तक जाएगा। विश्लेषकों का मानना है कि अगर भारत एक मिलियन टन से ज्यादा यूरिया खरीदता है, तो ग्लोबल यूरिया मार्केट और ऊपर जा सकता है। एशिया और अफ्रीका के छोटे खरीदार, जो अपनी फसल उत्पादकता के लिए इम्पोर्टेड यूरिया पर निर्भर हैं, उन्हें भारी लागत का सामना करना पड़ेगा। इससे फर्टिलाइजर का इस्तेमाल कम हो सकता है और फसल की पैदावार घट सकती है, जो वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा पैदा कर सकता है।
भारत के लिए, जहाँ खेती अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है, यह बढ़ी इम्पोर्ट कॉस्ट एक बड़ी चुनौती पेश करती है। सरकार ने फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए फर्टिलाइजर सब्सिडी का बजट 1.168 ट्रिलियन रुपये (लगभग $12.75 बिलियन) रखा है, जिसमें से 0.32 ट्रिलियन रुपये आयात के लिए हैं। इंटरनेशनल प्राइस में उतार-चढ़ाव को कवर करने के लिए अक्सर इन सब्सिडियों को बढ़ाना पड़ता है। यूरिया की मैक्सिमम रिटेल प्राइस (MRP) मार्केट रेट से काफी कम ($70/टन से भी कम) फिक्स है और सरकार इस अंतर का भुगतान करती है। ऐसे में, इम्पोर्ट बिड्स में यह बड़ी बढ़ोतरी सरकारी सब्सिडी बिल को और बढ़ाएगी, जिससे सरकारी खजाने पर दबाव बढ़ सकता है।
वर्तमान मूल्य स्तर ऐतिहासिक ऊंचाई के करीब हैं। अप्रैल 2022 में यूरिया फ्यूचर्स $1050 प्रति टन के आसपास पहुंच गए थे। इसकी तुलना में, नवंबर 2025 में IPL की एक पिछली टेंडर में $418-$419 प्रति टन जैसे कम ऑफर मिले थे। यह दिखाता है कि मार्केट की कंडीशन में कितना बड़ा बदलाव आया है। बांग्लादेश जैसे अन्य खरीदार भी इस अस्थिर मार्केट से जूझ रहे हैं। बांग्लादेश ने सप्लाई की अनिश्चितता के कारण यूरिया टेंडर रद्द कर दिए हैं और वैकल्पिक सोर्स की तलाश कर रहा है, जिसमें चीन, मिस्र और रूस शामिल हैं। हालांकि, बांग्लादेश ने सऊदी अरब से $390/टन पर यूरिया इम्पोर्ट किया है, जो IPL की वर्तमान टेंडर की तुलना में काफी कम है।
यह मौजूदा संकट ग्लोबल फर्टिलाइजर सप्लाई चेन में गहरी कमजोरियों का संकेत है। केंद्रित प्रोडक्शन साइट्स, फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता और जटिल इंटरनेशनल ट्रेड रूट्स सेक्टर को भू-राजनीतिक झटकों के प्रति संवेदनशील बनाते हैं। मिडिल ईस्ट संघर्ष ने इन कमजोरियों को उजागर किया है, जिससे लॉजिस्टिक्स में बाधा, फीडस्टॉक की ऊंची लागत और टाइट सप्लाई की स्थिति पैदा हो गई है। इसके कारण ग्लोबल स्तर पर यूरिया की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है, जिसका असर ब्राजील जैसे बड़े कृषि प्रधान देशों पर भी पड़ रहा है। यह लगातार जारी अस्थिरता फर्टिलाइजर की कीमतों में लंबे समय तक तेजी का संकेत देती है, जिसके ग्लोबल फूड प्रोडक्शन और लागत पर व्यापक असर हो सकते हैं।