खाद का इस्तेमाल घटाने की तैयारी! भारत में 'न्यूट्रिएंट क्रेडिट' प्लान की शुरुआत

AGRICULTURE
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AuthorAditi Chauhan|Published at:
खाद का इस्तेमाल घटाने की तैयारी! भारत में 'न्यूट्रिएंट क्रेडिट' प्लान की शुरुआत

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) ने फसल विविधीकरण (crop diversification) और प्राकृतिक खेती (natural farming) के ज़रिए रासायनिक खाद की खपत कम करने का प्रस्ताव दिया है। इस प्लान में 'न्यूट्रिएंट क्रेडिट सिस्टम' भी शामिल है, जो मात्रा से ज़्यादा उत्पादकता को बढ़ावा देगा। यह बदलाव पारंपरिक खाद कंपनियों के लिए नई चुनौतियां और एग्री-टेक (agri-tech) व प्रिसिजन फार्मिंग (precision farming) समाधानों के लिए नए अवसर लाएगा।

क्या है नई योजना?

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) के चेयरमैन, एस. महेंद्र देव, ने भारत की कृषि इनपुट नीति में एक बड़े रणनीतिक बदलाव की वकालत की है। 'इंडिया इनोवेटिव क्रॉप न्यूट्रिशन कॉन्क्लेव 2026' में उन्होंने कहा कि फसल विविधीकरण, प्राकृतिक खेती और बेहतर पोषक तत्व दक्षता (nutrient efficiency) के ज़रिए रासायनिक खाद की खपत पर लगाम लगाना ज़रूरी है। इस प्रस्ताव में एक 'न्यूट्रिएंट क्रेडिट सिस्टम' बनाने की बात है, जो कार्बन क्रेडिट की तरह काम करेगा। इसका मकसद किसानों को खाद की मात्रा के बजाय फसल की उत्पादकता के आधार पर वित्तीय प्रोत्साहन देना है।

दक्षता की ओर बढ़ता कदम

यह प्रस्ताव खाद के पारंपरिक वॉल्यूम-ड्रिवन (volume-driven) मॉडल से हटकर प्रिसिजन-आधारित (precision-based) तरीके पर ज़ोर देता है। सरकार का लक्ष्य बाजरा, दालें और तिलहन जैसी कम खाद वाली फसलों को बढ़ावा देना है, जिससे मिट्टी का स्वास्थ्य सुधरे और यूरिया के आयात बिल में कमी आए। 'एग्रीस्टैक' (AgriStack), सैटेलाइट मैपिंग और मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड जैसे डिजिटल उपकरणों का उपयोग करके, यह नीति हर एकड़ खेत के लिए वैज्ञानिक रूप से निर्धारित, हाइपर-लोकल (hyper-localized) पोषक बजट की कल्पना करती है। इस बदलाव को भारत के 2047 के आर्थिक विकास लक्ष्यों के लिए महत्वपूर्ण बताया जा रहा है।

पारंपरिक खाद कंपनियों पर असर

नीति की यह दिशा पारंपरिक खाद निर्माताओं के लिए बिज़नेस मॉडल में एक बड़े दीर्घकालिक बदलाव का संकेत देती है। भारत में कई खाद कंपनियां सरकारी सब्सिडी से संचालित होने वाले उच्च-मात्रा उत्पादन पर निर्भर हैं। पोषक तत्व उपयोग दक्षता (nutrient use efficiency) और फसल विविधीकरण की ओर सफल संक्रमण से यूरिया और डीएपी (Di-ammonium Phosphate) की बिक्री की मात्रा पर दबाव पड़ सकता है। निवेशकों को यह देखना होगा कि क्या स्थापित कंपनियां रासायनिक खाद की मांग में संभावित गिरावट की भरपाई के लिए ऑर्गेनिक इनपुट, बायो-फर्टिलाइजर या माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की ओर अपने उत्पाद पोर्टफोलियो में विविधता लाती हैं।

एग्री-टेक के लिए अवसर

पोषक तत्व दक्षता पर ध्यान केंद्रित करने से प्रिसिजन फार्मिंग (precision farming) से जुड़ी कंपनियों को सीधा फायदा होगा। जैसे-जैसे EAC-PM एआई (AI), आईओटी (IoT) और ड्रोन-आधारित छिड़काव के एकीकरण को बढ़ावा दे रहा है, इन तकनीकों को प्रदान करने वाले व्यवसायों की प्रासंगिकता बढ़ने की संभावना है। सरकार का वैज्ञानिक रूप से निर्धारित पोषक तत्व मिश्रण की ओर बढ़ने का इरादा बताता है कि डिजिटल मिट्टी परीक्षण सेवाएं, फार्म प्रबंधन सॉफ्टवेयर और प्रिसिजन छिड़काव उपकरण प्रदान करने वाली फर्में कृषि आपूर्ति श्रृंखला में अधिक महत्वपूर्ण हो सकती हैं।

निवेशकों को क्या देखना चाहिए?

कृषि क्षेत्र की निगरानी करने वाले निवेशक आने वाले महीनों में कई प्रमुख संकेतकों पर नज़र रख सकते हैं। सबसे पहले, 'न्यूट्रिएंट क्रेडिट सिस्टम' के लिए विशिष्ट दिशानिर्देश और कार्यान्वयन रोडमैप यह तय करेंगे कि यह नीति किसान के व्यवहार को कितनी जल्दी प्रभावित करती है। दूसरे, बाज़ार विश्लेषक प्रमुख खाद निर्माताओं के अनुसंधान एवं विकास (R&D) खर्च और उत्पाद लॉन्च पर नज़र रख सकते हैं कि क्या वे टिकाऊ या जैविक इनपुट श्रेणियों की ओर बढ़ रहे हैं। अंत में, ज़िला स्तर पर ड्रोन-आधारित और एआई-संचालित (AI-driven) खेती प्रौद्योगिकियों को अपनाने की दर यह दर्शाने का एक महत्वपूर्ण संकेतक होगा कि ज़मीनी स्तर पर दक्षता पहल को कितनी गति मिल रही है।

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