सरकार ने मछली उत्पादन को **30 मिलियन टन** तक पहुँचाने का महत्वाकांक्षी प्लान बनाया है। **₹1.25 लाख करोड़** के एक्सपोर्ट टारगेट से एक्वाकल्चर कंपनियों के लिए नए रास्ते खुल सकते हैं, लेकिन क्लाइमेट रिस्क पर नजर रखना भी जरूरी है।
बड़े लक्ष्यों की ओर भारत
केंद्रीय मत्स्य पालन विभाग (Union Department of Fisheries) ने मछली उत्पादन के लिए एक बड़ा खाका तैयार किया है। फिलहाल भारत का उत्पादन 19.7 मिलियन टन है, जिसे 2031 तक बढ़ाकर 30 मिलियन टन करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही सरकार ने सीफूड एक्सपोर्ट को मौजूदा ₹70,000 करोड़ से बढ़ाकर ₹1.25 लाख करोड़ तक ले जाने का रोडमैप तैयार किया है।
इनलैंड फिशरीज पर जोर
कुल उत्पादन में 75% हिस्सा इनलैंड फिशरीज (Inland Fisheries) का है। इसे और मजबूत करने के लिए सरकार जल्द ही 'नेशनल प्लान ऑफ एक्शन' (NPOA) लाने जा रही है, जिसका मकसद बुनियादी ढांचे (Infrastructure) की कमी को दूर करना और क्लाइमेट चेंज के खतरों से निबटना है।
बाजार और निवेशकों के लिए संकेत
यह सरकारी कदम Avanti Feeds, Waterbase Limited और Apex Frozen Foods जैसी कंपनियों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। उत्पादन बढ़ाने के लिए बेहतर फीड और प्रोसेसिंग यूनिट्स की जरूरत होगी, जिससे इन कंपनियों के बिजनेस में उछाल आ सकता है।
रिस्क फैक्टर (Risk Factors)
निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि:
- क्लाइमेट: पानी में ऑक्सीजन लेवल में बदलाव और बीमारी का खतरा प्रोडक्शन को कम कर सकता है।
- ग्लोबल डिमांड: एक्सपोर्ट के लिए अमेरिका और चीन पर निर्भरता से ग्लोबल प्राइसिंग और रेगुलेटरी बदलाव का रिस्क बना रहता है।
अगले महीने आने वाला NPOA इस पूरे सेक्टर की दिशा और कंपनियों को मिलने वाले इन्सेंटिव्स तय करेगा।
