Food Processing: भारत का बड़ा प्लान! 5 सालों में प्रोसेसिंग 10-12% से बढ़कर 25% होगी

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AuthorNeha Patil|Published at:
Food Processing: भारत का बड़ा प्लान! 5 सालों में प्रोसेसिंग 10-12% से बढ़कर 25% होगी

भारत सरकार अगले पांच सालों में देश की खाद्य प्रसंस्करण क्षमता को दोगुना करने की तैयारी में है। वर्तमान में जहां देश में 10-12% कृषि उपज की ही प्रोसेसिंग होती है, सरकार का लक्ष्य इसे बढ़ाकर 25% करने का है। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने बताया कि इस कदम से किसानों की आय बढ़ेगी, बर्बादी कम होगी और रोज़गार के नए अवसर पैदा होंगे।

Detailed Coverage

खाद्य प्रसंस्करण को मिलेगा बूस्ट!

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री, चिराग पासवान ने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार भारत को प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स का ग्लोबल हब बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। उन्होंने बताया कि खेतों के पास ही ज़्यादा से ज़्यादा प्रोसेसिंग यूनिट्स लगाकर, सरकार कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करना चाहती है और किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाना चाहती है।

छोटे प्रोसेसिंग यूनिट्स पर ज़ोर

इस योजना के तहत, सरकार खेतों के करीब ही छोटे और विकेन्द्रीकृत (decentralized) प्रोसेसिंग यूनिट्स बनाने पर ज़ोर दे रही है। इससे ट्रांसपोर्टेशन का खर्च कम होगा और माल खराब होने की समस्या भी घटेगी। यह कदम भारत के बिखरे हुए कृषि क्षेत्र के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इस पहल को प्रधानमंत्री फॉर्मलाइजेशन ऑफ माइक्रो फूड प्रोसेसिंग एंटरप्राइजेज (PMFME) और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) जैसे मौजूदा कार्यक्रमों का समर्थन हासिल है।

PLI स्कीम और FDI का सहारा

सरकार प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम का इस्तेमाल कर प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को आकर्षित करने की भी कोशिश कर रही है। इस स्कीम के तहत, जो कंपनियां अपनी मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट बढ़ाती हैं और नई क्षमता में निवेश करती हैं, उन्हें वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाता है। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में पहले से ही 100% फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) की अनुमति है, जिससे सरकार देसी और विदेशी कंपनियों को भारत में अपने कारोबार का विस्तार करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।

चुनौतियाँ और आगे की राह

हालांकि, यह क्षेत्र ज़्यादा परिपक्व उद्योगों की तुलना में उच्च विकास क्षमता वाला माना जाता है, लेकिन 25% प्रोसेसिंग लेवल तक पहुंचने के रास्ते में कई बड़ी चुनौतियाँ हैं। इस नीति की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि प्राइवेट कंपनियां छोटे स्तर पर कितनी प्रभावी ढंग से टिकाऊ यूनिट्स स्थापित कर पाती हैं, सप्लाई चेन को कैसे मैनेज करती हैं, और क्वालिटी को कैसे बनाए रखती हैं। इसके अलावा, प्रोसेस्ड फूड के मानकों पर सरकारी सख्ती बढ़ने के कारण उद्योग पर सटीक लेबलिंग और उपभोक्ताओं के साथ पारदर्शी संवाद सुनिश्चित करने का दबाव भी है।

निवेशकों के लिए क्या है खास?

इस सेक्टर के लिए मुख्य निगरानी योग्य बातों में नई क्षमता वृद्धि की गति, PLI-फंडेड प्रोजेक्ट्स की वास्तविक उपयोग दर और कृषि क्लस्टर के पास इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने में सरकार की प्रगति शामिल है। निवेशक उन नीतिगत घोषणाओं पर भी नज़र रख सकते हैं जो छोटे उद्यमों के लिए क्रेडिट और टेक्नोलॉजी तक पहुंच की प्रक्रिया को सरल बना सकती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.