खरीफ सीजन में मौसम की मार के बाद अब सरकार ने रबी सीजन के लिए **177.72 मिलियन टन** अनाज उत्पादन का लक्ष्य तय किया है। सूखे से निपटने के लिए 'वॉटर बजट' रणनीति अपनाई जाएगी और दाल-तिलहन की खरीद अब NAFED और NCCF के जरिए होगी।
भारत का कृषि क्षेत्र अब रबी सीजन पर अपनी पूरी उम्मीदें टिकाए बैठा है। खरीफ सीजन के दौरान मानसून की अनिश्चितता के कारण कई राज्यों में फसल उत्पादन प्रभावित हुआ था, जिसे देखते हुए सरकार ने इस बार 177.72 मिलियन टन अनाज उत्पादन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।
नई 'वॉटर बजट' रणनीति
महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे सूखे प्रभावित राज्यों में पानी की कमी को देखते हुए, कृषि मंत्रालय ने एक वैज्ञानिक 'वॉटर बजट' योजना तैयार की है। इसका उद्देश्य पारंपरिक बुवाई के बजाय उपलब्ध जल संसाधनों के आधार पर फसलों का चुनाव करना है, ताकि फसल बर्बादी के जोखिम को कम किया जा सके। निवेशकों के लिए यह संकेत है कि कृषि क्षेत्र में अब संसाधन प्रबंधन (Resource Management) की भूमिका पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है।
खरीद प्रक्रिया में बड़ा बदलाव
सरकार ने दालों और तिलहन की खरीद को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए इसे NAFED और NCCF के दायरे में केंद्रित कर दिया है। इस बदलाव से किसानों को बेहतर मार्केट सपोर्ट मिलने की उम्मीद है, साथ ही यह कदम सप्लाई चेन में आने वाले झटकों को रोकने में भी सहायक होगा।
बाजार पर असर
इस पूरी कवायद का सीधा असर रूरल इकोनॉमी और एग्री-इनपुट कंपनियों (सीड्स, फर्टिलाइजर और एग्रो-केमिकल) पर देखने को मिलेगा। यदि किसान कम पानी वाली फसलों की ओर रुख करते हैं, तो फर्टिलाइजर की मांग के पैटर्न में भी बदलाव आ सकता है। इसके अलावा, रबी सीजन की सफलता सीधे तौर पर फूड इन्फ्लेशन से जुड़ी है, जिस पर Reserve Bank of India (RBI) की पैनी नजर बनी रहती है। निवेशकों को आने वाले हफ्तों में जलाशयों के स्तर और बुवाई की रफ्तार पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि ये आंकड़े ही ग्रामीण खपत और महंगाई का भविष्य तय करेंगे।
