सरकार ने रबी सीजन **2026-27** के लिए **177.72 मिलियन टन** फूडग्रेन उत्पादन का लक्ष्य रखा है, जिसमें **121 मिलियन टन** सिर्फ गेहूं का हिस्सा है। हालांकि, पंजाब और हरियाणा जैसे प्रमुख राज्यों में बारिश की भारी कमी से फसल की बुवाई पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
उत्पादन का गणित
सरकार ने विंटर हार्वेस्ट के लिए जो लक्ष्य तय किया है, उसमें 121 मिलियन टन गेहूं, 17.20 मिलियन टन दालें, 22.30 मिलियन टन न्यूट्री-सीरियल्स और 16.72 मिलियन टन रबी चावल शामिल हैं। यह लक्ष्य पिछले सीजन के मुकाबले थोड़ा ऊंचा है, जो उम्मीदों को बढ़ाता है।
क्यों है चिंता की बात?
अक्टूबर में बुवाई शुरू होने से पहले मिट्टी में नमी का होना बेहद जरूरी है, लेकिन डेटा चिंताजनक है। 1 सितंबर से 18 सितंबर 2026 के बीच पंजाब में 56%, हरियाणा में 42% और महाराष्ट्र में 51% तक बारिश की कमी दर्ज की गई है। कम बारिश का सीधा असर बुवाई के रकबे (Acreage) पर पड़ सकता है।
निवेशकों के लिए संकेत
यह स्थिति सीधे तौर पर फर्टिलाइजर, सीड्स और क्रॉप प्रोटेक्शन कंपनियों के लिए रिस्क पैदा करती है। बुवाई प्रभावित होने से इन कंपनियों की बिक्री वॉल्यूम में गिरावट आ सकती है। वहीं, अगर फसल का उत्पादन उम्मीद से कम रहता है, तो गेहूं, दाल और तिलहन की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, जिसका सीधा असर एफएमसीजी (FMCG) और फूड प्रोसेसिंग कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ेगा।
IMD की चेतावनी
इंडिया मेट्रोलॉजिकल डिपार्टमेंट (IMD) ने अल-नीनो के असर के कारण सितंबर में सामान्य से कम बारिश और तापमान अधिक रहने का अनुमान जताया है। ऐसे में अक्टूबर और नवंबर में बुवाई की रफ्तार ही यह तय करेगी कि क्या भारत अपने उत्पादन लक्ष्य को हासिल कर पाएगा या मार्केट को सप्लाई शॉर्टेज का सामना करना पड़ेगा।
