Horticulture Sector: अब 'वॉल्यूम' नहीं 'वैल्यू' पर फोकस, बागवानी क्षेत्र में बड़े बदलाव की तैयारी

AGRICULTURE
Whalesbook Logo
AuthorMehul Desai|Published at:
Horticulture Sector: अब 'वॉल्यूम' नहीं 'वैल्यू' पर फोकस, बागवानी क्षेत्र में बड़े बदलाव की तैयारी

भारत ने अपने बागवानी (Horticulture) क्षेत्र की दिशा बदल दी है। अब ध्यान केवल उत्पादन बढ़ाने पर नहीं, बल्कि वैल्यू-एडेड प्रोसेसिंग पर है ताकि पोस्ट-हार्वेस्ट नुकसान को कम किया जा सके और ग्लोबल एक्सपोर्ट में हिस्सेदारी बढ़ाई जा सके।

उत्पादन का बड़ा आंकड़ा और चुनौतियां

भारत फल और सब्जियों के सबसे बड़े उत्पादकों में से एक है। 2025-26 में देश का कुल बागवानी उत्पादन लगभग 377.78 मिलियन टन तक पहुंच गया है। लेकिन, इतनी बड़ी सफलता के बावजूद, भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती 10% से 40% के बीच होने वाला पोस्ट-हार्वेस्ट नुकसान है। यह बर्बादी मुख्य रूप से पर्याप्त स्टोरेज और प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी के कारण होती है।

सरकार की नई रणनीति: क्लस्टर डेवलपमेंट प्रोग्राम (CDP)

नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड अब क्लस्टर डेवलपमेंट प्रोग्राम (CDP) के जरिए काम कर रहा है। इसमें किसानों, प्रोसेसर्स और एक्सपोर्टर्स के लिए एक इंटीग्रेटेड इकोसिस्टम बनाया जा रहा है। यूनियन बजट 2026-27 में कोको, काजू, मसाले और ड्राई फ्रूट्स जैसे हाई-वैल्यू फसलों पर खास जोर दिया गया है। मकसद साफ है—सिर्फ कच्चा माल पैदा न हो, बल्कि उसे प्यूरी, पाउडर या पैक्ड गुड्स में बदलकर उनकी वैल्यू बढ़ाई जाए।

प्राइवेट सेक्टर के लिए बड़े मौके

ग्लोबल मार्केट में बागवानी व्यापार में भारत की हिस्सेदारी अभी मात्र 1% से 2% है। इसे बढ़ाने के लिए सरकार BHARATI हब जैसी पहल लेकर आई है, जो एग्रीटेक और लॉजिस्टिक्स में प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को आकर्षित करेगी। डिजिटल ट्रेसेबिलिटी और कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश से फूड प्रोसेसिंग कंपनियों के लिए नई डिमांड पैदा हो सकती है।

जोखिम और चुनौतियां

इस लक्ष्य को हासिल करना इतना आसान भी नहीं है। जलवायु परिवर्तन (Climate Change) और खराब मौसम फसलों की पैदावार को अस्थिर बना रहे हैं। साथ ही, इंटरनेशनल मार्केट के सख्त फाइटोसैनिटरी मानकों को पूरा करने के लिए एडवांस क्वालिटी-टेस्टिंग लैब की जरूरत है। निवेशकों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि कितनी तेजी से ग्रामीण इलाकों में लॉजिस्टिक्स गैप को भरा जा सकता है और कैसे किसान अपनी फसल का बेहतर दाम पा सकते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.