सरकार ने साल 2026-27 के लिए **374 मिलियन टन** फूडग्रेन उत्पादन का लक्ष्य रखा है। मॉनसून में **12%** की कमी के बावजूद रबी सीजन के लिए सरकार ने **₹1,200 करोड़** का राहत पैकेज जारी किया है, जो रूरल डिमांड और एग्री-इनपुट सेक्टर के लिए अहम है।
भारत सरकार ने कृषि उत्पादन को गति देने के लिए वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 374 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य निर्धारित किया है। पिछले वर्ष यह आंकड़ा 377 मिलियन टन था। इस साल मॉनसून की बारिश में 12% की कमी को देखते हुए, यह लक्ष्य देश में महंगाई को नियंत्रित रखने और फूड सप्लाई को स्थिर करने की सरकार की कोशिशों को दर्शाता है।
कृषि मंत्रालय का बड़ा कदम
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए ₹1,200 करोड़ से ज्यादा के पैकेज को मंजूरी दी है। यह फंड मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल, हरियाणा और छत्तीसगढ़ सहित 10 राज्यों को दिया जाएगा, ताकि किसानों को समय पर खाद और सर्टिफाइड बीज मिल सकें। सरकार का जोर अब कम पानी खपत वाली फसलों जैसे दालों और तिलहन पर शिफ्ट होने का है, ताकि सीमित नमी में भी पैदावार अच्छी रहे।
निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?
निवेशकों की नजर से देखें, तो यह खबर एग्री-इनपुट सेक्टर के लिए काफी महत्वपूर्ण है। फर्टिलाइजर, बीज और पेस्टिसाइड बनाने वाली कंपनियों के लिए सरकारी मदद और किसानों का खर्च डिमांड बनाए रखने के लिए जरूरी है। अगर फसल अच्छी होती है, तो ग्रामीण आय में इजाफा होगा, जिसका सीधा फायदा FMCG कंपनियों और ट्रैक्टर बनाने वाली कंपनियों को मिलेगा।
रिस्क फैक्टर और चिंताएं
हालांकि, चुनौती अभी टली नहीं है। मॉनसून में 12% की कमी अक्टूबर से शुरू होने वाले रबी सीजन के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। यदि जलाशयों का स्तर और मिट्टी में नमी कम बनी रहती है, तो पैदावार पर असर पड़ सकता है, जिससे फूड इन्फ्लेशन यानी खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं। इसका सीधा असर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की ब्याज दरों पर भी पड़ सकता है। अब बाजार की नजर रबी सीजन की बुआई और फसल की सेहत पर होगी।
