भारत का 'डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन' अब रफ्तार पकड़ रहा है। AgriStack के जरिए अब तक **10.3 करोड़** से ज्यादा किसानों को जोड़ा जा चुका है। **₹2,817 करोड़** के बजट वाली इस योजना का मकसद खेती को पारंपरिक तरीकों से निकालकर डेटा-आधारित 'प्रिसिजन एग्रीकल्चर' की ओर ले जाना है।
भारत सरकार खेती के तरीके को पूरी तरह बदलने की तैयारी में है। 'डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन' के तहत AgriStack को एक मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के रूप में खड़ा किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य खेती से जुड़े हर डेटा को एक सेंट्रल डेटाबेस में लाना है।
सितंबर 2026 तक, इस मिशन के तहत 10.3 करोड़ से ज्यादा किसानों का रजिस्ट्रेशन पूरा हो चुका है। यह पूरा सिस्टम तीन मुख्य स्तंभों पर टिका है: किसान रजिस्ट्री, विलेज मैप्स और फसल-बुवाई रजिस्ट्री। इसके साथ ही Bharat-VISTAAR जैसे AI टूल का इस्तेमाल करके किसानों को मौसम, कीट नियंत्रण और फसल की सेहत से जुड़ी सटीक सलाह देने की योजना है।
एग्री-इकोसिस्टम पर असर
इस पहल का असर कई सेक्टरों पर पड़ेगा। बैंकिंग सेक्टर के लिए जमीन के मालिकाना हक और फसलों की जानकारी का डिजिटल रिकॉर्ड मिलने से क्रेडिट देना आसान होगा और लोन डिफॉल्ट कम होंगे। वहीं, इंश्योरेंस कंपनियां दावों (claims) के निपटान में तेजी ला सकेंगी। खाद, बीज और कीटनाशक बनाने वाली कंपनियां भी इस डेटा का इस्तेमाल डिमांड फोरकास्टिंग के लिए कर सकेंगी, जिससे उनकी सप्लाई चेन और इन्वेंटरी बेहतर होगी।
चुनौतियां और रिस्क
डिजिटलाइजेशन के फायदे तो कई हैं, लेकिन इसमें कुछ चुनौतियां भी हैं। डेटा प्राइवेसी एक बड़ी चिंता है, जिसके लिए सरकार को 'डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट' का सख्ती से पालन करना होगा। साथ ही, 'डिजिटल डिवाइड' की समस्या भी बड़ी है, क्योंकि AI-आधारित सलाह का फायदा उसी किसान को मिलेगा जिसके पास स्मार्टफोन और इंटरनेट है। राज्यों के बीच डेटा तालमेल बिठाना भी एक कठिन काम है, जिस पर निवेशकों की नजर रहनी चाहिए।
