क्या है नई MSP दरें?
सरकार की कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (CCEA) ने इस सीज़न के लिए एमएसपी बढ़ाने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। इसमें सूरजमुखी बीज का एमएसपी सबसे ज़्यादा ₹622 प्रति क्विंटल बढ़ाया गया है। वहीं, कपास का एमएसपी ₹557 प्रति क्विंटल का इजाफा हुआ है। इसके अलावा, नाइजरसीड (Nigerseed) में ₹515 और तिल (Sesamum) में ₹500 प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है। यह कदम तेलबीज (Oilseeds) और फाइबर (कपास) जैसी महत्वपूर्ण फसलों को बढ़ावा देने की सरकारी नीति का हिस्सा है।
किसानों को होगी 50% से ज़्यादा कमाई?
सरकार की पॉलिसी के अनुसार, एमएसपी को उत्पादन लागत (Cost of Production) के कम से कम 1.5 गुना पर निर्धारित किया जाता है। इसका मतलब है कि किसानों को अपनी फसल की लागत पर कम से कम 50% का मुनाफा मिलना तय है। अनुमान है कि मूंग की खेती करने वाले किसानों को सबसे ज़्यादा, करीब 61% का मार्जिन मिलेगा। वहीं, बाजरा और मक्का पर 56% और तुअर (Arhar) पर 54% का मुनाफा होगा।
वैश्विक संकट के बीच भारत का मजबूत कदम
यह एमएसपी बढ़ोतरी ऐसे समय में आई है जब दुनिया भर में उर्वरक (Fertilizer) की आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) गंभीर संकट से गुजर रही है। रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव के कारण यूरिया की कीमतें दोगुनी हो गई हैं, और फॉस्फेट उर्वरक के दाम $900 प्रति टन को पार कर रहे हैं। भारत, जो उर्वरकों के आयात पर बहुत अधिक निर्भर है, को शिपिंग में देरी और बढ़ती लागत जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में, तेलबीज और कपास जैसी फसलों के लिए एमएसपी बढ़ाना, घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने और आयात पर निर्भरता कम करने की एक बड़ी रणनीति मानी जा रही है। भारत सालाना $12 बिलियन से ज़्यादा सिर्फ़ उर्वरक आयात पर खर्च करता है।
'श्री अन्न' और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम
यह फैसला सरकार की उस व्यापक योजना का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य भारत की खेती को अनाज-आधारित से बदलकर दालों, तेलबीज और पोषक-अनाज ('श्री अन्न') की ओर ले जाना है। सरकार का लक्ष्य 2027 तक दालों में आत्मनिर्भरता हासिल करना है। पिछले कुछ सालों में, एमएसपी पर की गई खरीद और किसानों को दिए गए भुगतान में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है। यूनियन बजट 2026-27 में भी डिजिटल फार्मिंग, AI-संचालित सलाह और नई तकनीकों को अपनाने पर ज़ोर दिया गया है ताकि खेती की उत्पादकता और लचीलापन बढ़ाया जा सके। सरकार इन खरीदों के माध्यम से किसानों को कुल लगभग ₹2.6 लाख करोड़ का भुगतान करने की उम्मीद कर रही है।
