भारतीय कृषि मंत्रालय ने पैराक्वाट डाइक्लोराइड (Paraquat dichloride) के आयात, बिक्री और इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। किसानों की सेहत पर पड़ने वाले गंभीर खतरों को देखते हुए यह बड़ा कदम उठाया जा रहा है। इस जहरीले केमिकल का कोई तोड़ (antidote) भी नहीं है। सरकार इस पर अंतिम फैसला लेने से पहले संबंधित पक्षों से **30 दिनों** का फीडबैक मांगेगी।
पैराक्वाट पर पूर्ण प्रतिबंध की ओर भारत
केंद्र सरकार एक ऐसे हर्बिसाइड (खरपतवारनाशक) पर पूरी तरह से बैन लगाने की दिशा में आगे बढ़ रही है, जो बेहद खतरनाक है। कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने 13 जुलाई 2026 को पैराक्वाट डाइक्लोराइड से जुड़ी सभी गतिविधियों, जैसे कि इसका उत्पादन, आयात, परिवहन और खेतों में इस्तेमाल, पर रोक लगाने के लिए एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है।
सेहत के लिए बड़ा खतरा
दुनियाभर की स्वास्थ्य संस्थाएं पैराक्वाट को सबसे खतरनाक कृषि रसायनों में से एक मानती हैं। मेडिकल रिपोर्ट्स के अनुसार, पैराक्वाट पॉइज़निंग का कोई स्पेसिफिक इलाज (antidote) मौजूद नहीं है। थोड़ी सी मात्रा में भी अगर यह गलती से पेट में चला जाए या स्किन के संपर्क में आए, तो फेफड़ों, लिवर और किडनी को जानलेवा नुकसान पहुंचा सकता है। इन खतरों को देखते हुए, यूरोपियन यूनियन, यूके और चीन समेत 70 से ज़्यादा देश पहले ही इस पर बैन लगा चुके हैं या इसके इस्तेमाल को गंभीर रूप से सीमित कर चुके हैं।
क्या है अगली प्रक्रिया?
इस प्रस्ताव पर Insecticides Act, 1968 के तहत कार्रवाई की जा रही है। ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी करके, सरकार ने 30 दिनों की समीक्षा अवधि शुरू की है। इस दौरान, उद्योग से जुड़े लोग, किसान और अन्य हितधारक अपने सुझाव या आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। इस अवधि के समाप्त होने के बाद, मंत्रालय प्राप्त फीडबैक का मूल्यांकन करेगा और फिर स्थायी प्रतिबंध पर अंतिम निर्णय लेगा।
एग्री-केमिकल सेक्टर पर असर
यह कदम भारत के एग्री-केमिकल सेक्टर के लिए रेगुलेटरी माहौल के और सख्त होने का संकेत देता है। पैराक्वाट अपने असरदार और सस्ते होने के कारण खरपतवार नियंत्रण का एक आम तरीका रहा है। लेकिन अब इंडस्ट्री को सुरक्षित, वैकल्पिक केमिकल या मैकेनिकल तरीकों की ओर बढ़ना होगा। जिन कंपनियों का बिजनेस इस हर्बिसाइड के उत्पादन या वितरण से जुड़ा है, उन्हें नए नियमों का पालन करने के लिए अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में बदलाव लाना होगा, जिससे उनके रेवेन्यू पर दबाव आ सकता है।
भविष्य की नीतियां
बाजार के जानकार मानते हैं कि यह फैसला एक मिसाल बन सकता है, जिसके तहत भारत में मौजूद अन्य ऐसे कीटनाशकों की भी समीक्षा की जा सकती है जिन पर पहले से ही अंतरराष्ट्रीय बाजारों में रोक लगी हुई है। जैसे-जैसे दुनिया भर में स्वास्थ्य और सुरक्षा के मानक बदल रहे हैं, ऐसे में उन रसायनों को फेज-आउट करने पर फोकस बढ़ेगा जो मानव स्वास्थ्य या पर्यावरण के लिए लंबे समय तक जोखिम पैदा करते हैं। कृषि इनपुट कंपनियों पर नजर रखने वाले निवेशकों को यह देखना होगा कि ये कंपनियां इन बदलावों और लागतों को कैसे मैनेज करती हैं। अंतिम फैसला फीडबैक और सरकारी समीक्षा पर निर्भर करेगा।
