भारत सरकार अपनी Nutrient Based Subsidy (NBS) स्कीम में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। इसका मुख्य उद्देश्य DAP फर्टिलाइजर के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना और ग्लोबल मार्केट के उतार-चढ़ाव से बचना है।
सब्सिडी का नया गणित
सरकार Nutrient Based Subsidy (NBS) स्कीम में फेरबदल कर रही है, ताकि DAP जैसे नॉन-यूरिया फर्टिलाइजर बनाने वाली कंपनियों को बेहतर सपोर्ट मिल सके। अभी भारत फर्टिलाइजर और कच्चे माल के लिए बड़े पैमाने पर आयात (Import) पर निर्भर है। सरकार अब एक ऐसा 'डिफरेंशियल सब्सिडी मॉडल' ला रही है, जिसमें उन कंपनियों को ज्यादा वित्तीय मदद दी जाएगी जो कच्चे माल की प्रोसेसिंग भारत में ही करती हैं।
स्थानीय प्रोसेसिंग पर जोर
फिलहाल, सल्फर जैसी कच्ची सामग्रियों की कीमतों में तेजी से कंपनियों के मार्जिन पर दबाव रहता है। नई नीति के तहत, अगर कोई कंपनी रॉक फॉस्फेट (Rock Phosphate) को भारत में लाकर उसे फॉस्फोरिक एसिड (Phosphoric Acid) में बदलती है, तो उसे ज्यादा सब्सिडी मिलेगी, बजाय उस कंपनी के जो तैयार माल का आयात करती है।
किन कंपनियों पर पड़ेगा असर?
यह बदलाव Coromandel International, Paradeep Phosphates और Chambal Fertilisers जैसी दिग्गज कंपनियों के लिए बहुत अहम है। जिन कंपनियों ने पहले से ही बैकवर्ड इंटीग्रेशन (Backward Integration) पर खर्च किया है, उन्हें नई नीति से ज्यादा मुनाफा हो सकता है। आने वाले रबी सीजन के लिए सरकार इस पूरी सप्लाई चेन को मजबूत करना चाहती है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
निवेशकों को अब सरकार के ऑफिशियल इंप्लीमेंटेशन प्लान और सब्सिडी की दरों पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए। क्या यह नीति कंपनियों के मार्जिन को स्थिर कर पाएगी? यह तिमाही नतीजों में साफ हो जाएगा। हालांकि, कच्चे माल की वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव एक रिस्क बना रहेगा, इसलिए कंपनियों के मैनेजमेंट की कॉमेंट्री सुनना जरूरी होगा।
