सरकार ने खेती की उत्पादकता बढ़ाने के लिए मार्च **2027** तक **300** कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) को आधुनिक बनाने का लक्ष्य रखा है। इसमें इन्फ्रास्ट्रक्चर और स्किल सेंटर्स पर फोकस किया जाएगा, हालांकि स्टाफिंग और फंडिंग की चुनौतियां अब भी बरकरार हैं।
भारत सरकार ने कृषि विस्तार सेवाओं को नई ऊंचाई देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च (ICAR) के अंतर्गत आने वाले 300 प्राथमिकता वाले कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) का कायाकल्प मार्च 2027 तक पूरा कर लिया जाएगा। ये केंद्र किसानों को तकनीकी ट्रेनिंग और आधुनिक खेती के तौर-तरीकों की जानकारी देने में बड़ी भूमिका निभाते हैं।
स्टाफिंग और सुधार के उपाय
ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाने के लिए डिपार्टमेंट ऑफ एक्सपेंडिचर ने स्टाफ के लिए नए पे-स्केल, भत्तों और प्रमोशन नियमों को मंजूरी दी है। इसका मुख्य उद्देश्य रिक्रूटमेंट में आने वाली बाधाओं को दूर करना है। इसके साथ ही, दिसंबर 2028 तक हर KVK में 'इन्क्यूबेशन-कम-स्किल सेंटर' स्थापित किए जाएंगे, जो 'प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना' के लक्ष्यों के अनुरूप हैं।
चुनौतियां और हकीकत
प्रोग्राम के सामने सबसे बड़ी चुनौती स्टाफ की कमी और फंड के लिए राज्य सरकारों पर निर्भरता है। अब राज्य सरकारें KVK कर्मियों के लिए नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और रिटायरमेंट बेनेफिट्स मैनेज करेंगी। डेटा के अनुसार, देश के कुल 731 KVK में से करीब 43% हाई-परफॉर्मेंस रेटिंग रखते हैं, जबकि 10% केंद्र बुनियादी ढांचे की कमी के कारण निचले पायदान पर हैं।
निवेशकों के लिए जरूरी बात
स्पष्ट कर दें कि ये कृषि विज्ञान केंद्र ICAR के अंतर्गत आने वाले गैर-लाभकारी (non-profit) संस्थान हैं और ये कोई लिस्टेड कॉर्पोरेट एंटिटी नहीं हैं। इनका स्टॉक मार्केट से कोई सीधा लेना-देना नहीं है। हालांकि, इनके बेहतर प्रदर्शन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि उपकरणों की मांग पर असर पड़ सकता है, लेकिन यह कोई निवेश इवेंट नहीं है।
