सप्लाई टाइट, भारत ने कसी कमर
देश की मुख्य फर्टिलाइजर सोर्सिंग एजेंसी, इंडियन पोटैश लिमिटेड (Indian Potash Ltd.), अपनी सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए ज़रूरी कदम उठा रही है। ऐसे वक्त में जब दुनिया जियोपॉलिटिकल अस्थिरता का सामना कर रही है, भारत की चिंता बढ़ गई है। आपको बता दें कि दुनिया भर में यूरिया की सप्लाई का लगभग 50% हिस्सा फारस की खाड़ी (Persian Gulf) से होकर गुजरता है, जो इन दिनों काफी तनाव में है। ऐसे में भारत, जो दुनिया का सबसे बड़ा यूरिया खरीदार है, अपने मॉनसून सीजन के लिए बेहद असुरक्षित स्थिति में है।
घरेलू प्रॉडक्शन पर भी असर
भारत का डोमेस्टिक यूरिया प्रॉडक्शन बड़े पैमाने पर इम्पोर्टेड नेचुरल गैस पर निर्भर करता है, खासकर मध्य पूर्व से आने वाली गैस पर। हाल ही में एलएनजी (LNG) सप्लाई में आई रुकावटों और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास की टेंशन के चलते, कुछ साउथ एशियन फर्टिलाइजर प्लांट्स को अपना काम बंद करना पड़ा है। इस वजह से लोकल आउटपुट में आई कमी को पूरा करने के लिए बड़े इम्पोर्ट प्लान की ज़रूरत है। जून से सितंबर तक चलने वाले बरसात के मौसम के लिए करीब 39 मिलियन टन यूरिया की ज़रूरत पड़ेगी, जबकि अभी हमारे पास लगभग 18 मिलियन टन का स्टॉक है।
फौरन टेंडर जारी
इंडियन पोटैश लिमिटेड ने 2.5 मिलियन टन यूरिया की खरीद के लिए फौरन टेंडर जारी कर दिए हैं। इसके तहत करीब 1.5 मिलियन टन यूरिया वेस्ट कोस्ट (West Coast) के ज़रिए इम्पोर्ट किया जाएगा, जबकि बाकी बचा हुआ ईस्ट कोस्ट (East Coast) पर आएगा। उम्मीद है कि 14 जून तक यह शिपमेंट लोडिंग पोर्ट्स से निकल जाएंगे। टेंडर ऑफर्स 15 अप्रैल तक मांगे गए हैं और वे 23 अप्रैल तक मान्य रहेंगे। यह टाइमलाइन बताती है कि बुवाई का काम तेज़ होने से पहले सप्लाई को कितनी जल्दी सुरक्षित करना ज़रूरी है।