पुराने कानूनों की जगह लेगा नया बिल
भारत में कीटनाशक (Pesticide) से जुड़े नियमों को आधुनिक बनाने के लिए Pesticide Management Bill लाया जा रहा है, जो 1968 के Insecticides Act की जगह लेगा। सरकार का लक्ष्य कृषि क्षेत्र (Agriculture Sector) और घरेलू इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के साथ-साथ पर्यावरण और सेहत को लेकर बढ़ती जागरूकता का भी ध्यान रखना है। हालांकि, इंडस्ट्री और सिविल सोसाइटी के कई समूह इस ड्राफ्ट का विरोध कर रहे हैं। उन्हें चिंता है कि यह बिल नियमों को आसान बनाने के बजाय उलझनें बढ़ा सकता है।
बाजार का बढ़ता आकार और पुराने नियम
भारत का कीटनाशक बाजार (Pesticide Market) काफी बड़ा है और इसके 2025 में लगभग ₹27,487 करोड़ से बढ़कर 2034 तक ₹46,427 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। बढ़ती खेती और खाद्य सुरक्षा (Food Security) की जरूरतें इस ग्रोथ को बढ़ावा दे रही हैं। मौजूदा Insecticides Act, 1968, नियमों को लागू कराने, क्वालिटी चेक और खाने में कीटनाशक अवशेष (Residues) को कंट्रोल करने में कमजोर साबित हुआ है। कई खाद्य पदार्थों में इसकी तय सीमा से ज्यादा मात्रा पाई गई है। नया बिल एक सेंट्रल पेस्टिसाइड्स बोर्ड और रजिस्ट्रेशन कमेटी (Registration Committee) बनाने का प्रस्ताव देता है, ताकि अप्रूवल प्रक्रिया (Approval Process) को सुधारा जा सके। हालांकि, इसकी सफलता मजबूत निगरानी (Oversight) और लागू करने पर निर्भर करेगी।
इंडस्ट्री की नवाचार (Innovation) और सुरक्षा को लेकर चिंताएं
इंडस्ट्री की सबसे बड़ी चिंता है रेगुलेटरी डेटा प्रोटेक्शन (RDP) का कमजोर होना। CropLife India जैसी कंपनियां, जो नए और सुरक्षित केमिकल कंपाउंड्स (Chemical Compounds) बनाने में निवेश करती हैं, उन्हें डर है कि उनके रिसर्च का डेटा सुरक्षित नहीं रहेगा। इससे पुरानी और ज्यादा जोखिम वाली केमिकल पर निर्भरता बढ़ सकती है। ग्लोबल स्टैंडर्ड्स के मुकाबले भारत काफी पीछे है, जहां दूसरे देश 10 साल तक डेटा एक्सक्लूसिविटी (Data Exclusivity) देते हैं। इसके बिना, इनोवेटर्स (Innovators) नए पेस्टिसाइड्स लाने से हिचकिचा सकते हैं, जो प्रतिरोधक कीटों (Resistant Pests) से लड़ने और एक्सपोर्ट मार्केट के लिए जरूरी हैं।
इसी तरह, CropLife India ने कीटनाशक की ऑनलाइन बिक्री (Online Sales) को लेकर बड़े रेगुलेटरी गैप (Regulatory Gap) की ओर इशारा किया है। ड्राफ्ट बिल यह साफ नहीं करता कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म (E-commerce Platform) विक्रेताओं (Sellers) की पहचान कैसे करेंगे, प्रोडक्ट्स को ट्रैक कैसे करेंगे या बिक्री के इलाकों को कैसे लागू करेंगे। इससे नकली या अनधिकृत (Unauthorized) प्रोडक्ट्स आसानी से किसानों तक पहुंच सकते हैं, जो सीधे तौर पर खतरे पैदा करेगा और बिल के सुरक्षा लक्ष्यों के खिलाफ होगा। इंडस्ट्री रजिस्ट्रेशन कमेटी के फैसलों के लिए भी स्पष्ट नियम और समय-सीमा चाहती है, क्योंकि मौजूदा अप्रूवल प्रक्रिया काफी जटिल और धीमी है।
प्रवर्तन (Enforcement), जवाबदेही (Accountability) और कॉर्पोरेट लायबिलिटी (Corporate Liability)
सिविल सोसाइटी ग्रुप्स जैसे PAN India भी इन मुद्दों पर सहमति जताते हैं, खासकर सेंट्रल पेस्टिसाइड्स बोर्ड की भूमिका पर, जो काफी हद तक सलाह देने वाली है। वे स्पष्ट जिम्मेदारियों (Duties) और जवाबदेही (Accountability) की मांग करते हैं ताकि सलाह का असर हो सके। Insecticides Act को लागू कराने में ऐतिहासिक रूप से कमी रही है, क्योंकि इंस्पेक्टर और लैब पर्याप्त नहीं हैं। इससे अवैध कीटनाशकों और उच्च अवशेष स्तरों (High Residue Levels) की समस्या बनी हुई है। आलोचकों का तर्क है कि नया बिल इन कमियों को ठीक करने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाता। इसके अलावा, CropLife India कॉर्पोरेट लायबिलिटी (Corporate Liability) को लेकर भी स्पष्ट नियमों की मांग कर रही है। उन्हें चिंता है कि डायरेक्ट इनवॉल्वमेंट के बिना कंपनी के लीडर्स पर ब्रॉड प्रोसिक्यूशन (Broad Prosecution) हो सकता है, जो व्यापार संचालन और निवेश को हतोत्साहित कर सकता है।
बिल के अंतिम स्वरूप पर निर्भर करेगा भविष्य
भारत का एग्रोकेमिकल सेक्टर (Agrochemical Sector) विस्तार के लिए तैयार है, लेकिन इसकी रफ्तार और नवाचार (Innovation) की क्षमता काफी हद तक Pesticide Management Bill के अंतिम स्वरूप पर निर्भर करेगी। यदि बिल में मजबूत डेटा प्रोटेक्शन, स्पष्ट एनफोर्समेंट (Enforcement) और ऑनलाइन बिक्री की निगरानी जैसे प्रावधान शामिल होते हैं, तो यह एक उन्नत इंडस्ट्री को बढ़ावा दे सकता है। अगर इन चिंताओं पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह बिल नियामक समस्याओं को बढ़ा सकता है, नवाचार को रोक सकता है और किसानों व पर्यावरण को निम्न-श्रेणी के उत्पादों और प्रथाओं के प्रति उजागर कर सकता है।
