सरकार गन्ने को एथेनॉल (Ethanol) बनाने के लिए इस्तेमाल करने पर रोक लगाने पर विचार कर रही है। इसका मकसद चीनी का डोमेस्टिक सप्लाई (Domestic Supply) को **30 लाख मीट्रिक टन** तक बढ़ाना है। सरकार की इस चाल से चीनी की रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंची कीमतों को स्थिर करने में मदद मिलेगी, जो हाल ही में **₹48-50 प्रति किलो** तक पहुंच गई हैं। एथेनॉल ब्लेंडिंग (Ethanol Blending) के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए, सरकार मक्के और चावल जैसे अन्य फीडस्टॉक (Feedstock) का इस्तेमाल बढ़ा सकती है।
चीनी की सप्लाई पर फोकस
सरकार अगले सीजन (जो अक्टूबर में शुरू होगा) से एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने के इस्तेमाल को सीमित करने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। इस कदम से डोमेस्टिक चीनी की उपलब्धता में अनुमानित 30 लाख मीट्रिक टन की बढ़ोतरी होगी। इसका मुख्य उद्देश्य चीनी की कीमतों में आई हालिया उछाल को काबू करना है, जिसके चलते खुदरा चीनी की कीमतें ₹48-50 प्रति किलो और थोक भाव ₹4,750-4,800 प्रति क्विंटल के करीब पहुंच गए हैं।
उत्पादन पर असर
महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में बारिश की कमी के कारण उत्पादन अनुमान कम हो गया है, जिससे सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। इस स्थिति से निपटने के लिए, सरकार ने पहले ही 1 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक चीनी डीलरों के लिए स्टॉक होल्डिंग लिमिट (Stock Holding Limits) लागू कर दी है। नए प्रस्ताव के तहत, मिलों को गन्ने के रस और बी-हैवी मोलासेस (B-heavy molasses) से एथेनॉल का उत्पादन रोकने की संभावना है। इसके बजाय, वे सी-हैवी मोलासेस (C-heavy molasses) पर ध्यान केंद्रित करेंगे, जिसमें चीनी की मात्रा कम होती है और उपभोग के लिए अधिक चीनी उपलब्ध रहती है।
एथेनॉल लक्ष्य और मुनाफे के बीच संतुलन
देश के 20% एथेनॉल-ब्लेंडिंग प्रोग्राम (Ethanol-Blending Program) को पटरी पर बनाए रखने के लिए, सरकार मक्के और चावल को मुख्य फीडस्टॉक के तौर पर इस्तेमाल करने का इरादा रखती है। चीनी मिलों के लिए, यह बदलाव एक चुनौतीपूर्ण वित्तीय स्थिति पैदा करता है। हालांकि चीनी उत्पादन बढ़ने से राजस्व की मात्रा बढ़ सकती है, लेकिन कई मिलों के प्रॉफिट मार्जिन (Profit Margins) पर दबाव पड़ा है। गन्ने की लागत में लगभग 16% की बढ़ोतरी के बावजूद, एथेनॉल खरीद की कीमतें 2022-23 की अवधि से काफी हद तक स्थिर बनी हुई हैं।
रेगुलेटरी और जलवायु जोखिम
निवेशकों के लिए, मुख्य चिंता रेगुलेटरी अनिश्चितता (Regulatory Uncertainty) का उच्च स्तर बनी हुई है। चीनी क्षेत्र अक्सर निर्यात प्रतिबंध, फीडस्टॉक नियंत्रण और स्टॉक सीमा जैसे नीतिगत बदलावों के प्रति संवेदनशील होता है, जो दीर्घकालिक परिचालन योजना को जटिल बनाते हैं। इसके अतिरिक्त, अनियमित वर्षा पैटर्न जैसे जलवायु जोखिम भी गन्ना उपज के लिए खतरा बने हुए हैं।
निवेशक फीडस्टॉक के उपयोग पर निश्चित नियमों और नए सीजन के उत्पादन डेटा के लिए आगामी आधिकारिक अधिसूचनाओं पर नजर रख सकते हैं। यह समझना महत्वपूर्ण होगा कि क्या अनाज (मक्का और चावल) की उपलब्धता, इनपुट लागत को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाए बिना, गन्ने पर आधारित एथेनॉल के नुकसान की प्रभावी ढंग से भरपाई कर सकती है। यह आने वाली तिमाहियों में सेक्टर के वित्तीय प्रदर्शन का आकलन करने के लिए आवश्यक होगा।
