Post-Harvest Waste: देश को हर साल **₹4,818 करोड़** का नुकसान, खेती के तरीके में बड़े बदलाव की जरूरत

AGRICULTURE
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AuthorMehul Desai|Published at:
Post-Harvest Waste: देश को हर साल **₹4,818 करोड़** का नुकसान, खेती के तरीके में बड़े बदलाव की जरूरत

WRI India की एक नई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में प्याज, सोयाबीन और सीताफल की सप्लाई चेन में खामियों के कारण देश को हर साल **₹4,818 करोड़** का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

भारत का कृषि क्षेत्र एक बड़ी आर्थिक चुनौती से जूझ रहा है। WRI India की हालिया स्टडी के मुताबिक, सप्लाई चेन की अक्षमताओं के चलते करीब 1.7 मिलियन टन अनाज और फल बर्बाद हो रहे हैं। यह नुकसान न सिर्फ किसानों की कमाई पर असर डाल रहा है, बल्कि बुनियादी ढांचे में बड़ी खामियों की पोल भी खोल रहा है।

फसल दर फसल कहां हो रही है चूक?

  • प्याज: रबी सीजन के दौरान स्टोरेज और सही हवा की कमी के चलते प्याज बड़ी मात्रा में सड़ रहे हैं।
  • सोयाबीन: हार्वेस्टर मशीनों के सही से कैलिब्रेटेड न होने और बेमौसम बारिश की नमी के कारण फसल को भारी नुकसान हो रहा है।
  • सीताफल: हैंडलिंग की गलतियों और गर्मी के दबाव के कारण इनकी बर्बादी की दर काफी ज्यादा है।

पर्यावरण और पोषण पर मार

आर्थिक नुकसान के अलावा, इसका पर्यावरणीय प्रभाव भी गंभीर है। इन बर्बादियों से 1 मिलियन टन से ज्यादा कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन हो रहा है। वहीं, सोयाबीन की बर्बादी से हर साल 1.47 लाख टन प्रोटीन का नुकसान हो रहा है, जो देश के पोषण लक्ष्यों के लिए एक बड़ी बाधा है।

बाजार के लिए क्या हैं संकेत?

रिपोर्ट के मुताबिक, अब कोल्ड चेन लॉजिस्टिक्स, क्लाइमेट-कंट्रोल्ड स्टोरेज और आधुनिक हार्वेस्टिंग इक्विपमेंट में निवेश की तत्काल जरूरत है। आने वाले समय में फार्म-टेक और लॉजिस्टिक्स सेक्टर की कंपनियों पर इन समस्याओं को हल करने का दबाव बढ़ेगा, जो निवेशकों के लिए एक बड़ा 'मॉनिटरेबल' फैक्टर साबित हो सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.