Kharif Sowing: खरीफ बुआई में **1.7%** की गिरावट, क्या कृषि सेक्टर पर पड़ेगा असर?

AGRICULTURE
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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Kharif Sowing: खरीफ बुआई में **1.7%** की गिरावट, क्या कृषि सेक्टर पर पड़ेगा असर?

भारत में खरीफ फसलों की बुआई का सीजन **1,071.10 लाख हेक्टेयर** के साथ समाप्त हो गया है। पिछले साल के मुकाबले इसमें करीब **1.7%** की गिरावट दर्ज की गई है, जिसकी मुख्य वजह मानसून की **14%** कमी है।

बुआई में कमी के मुख्य कारण

कृषि मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, इस सीजन में कुल 1,071.10 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुआई हुई है, जो पिछले साल की समान अवधि के 1,090.01 लाख हेक्टेयर से कम है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, जून से अगस्त के बीच मानसून में करीब 14% की कमी देखी गई। देश के कई जिलों में बारिश 20% से भी कम रही, जिसने प्रमुख फसलों की बुआई पर असर डाला है। जहां धान (Paddy) और मक्का (Maize) की बुआई में कमी आई, वहीं उड़द जैसी दालों ने मजबूती दिखाई है।

बाजार पर असर और निवेश का नजरिया

निवेशकों के लिए अब सिर्फ बुआई ही नहीं, बल्कि अंतिम पैदावार (Crop Yield) पर नजर रखना अहम है। सितंबर में गर्मी का असर फसलों की पैदावार को प्रभावित कर सकता है। अगर फसल उत्पादन उम्मीद से कम रहता है, तो इसका सीधा असर ग्रामीण आय (Rural Income) पर पड़ेगा। रूरल डिमांड घटने से एफएमसीजी (FMCG), ट्रैक्टर और टू-व्हीलर कंपनियों की बिक्री पर दबाव बन सकता है। इसके अलावा, उत्पादन में कमी महंगाई (Inflation) को हवा दे सकती है, जिस पर सरकार और आरबीआई (RBI) की नीति बदल सकती है।

एग्री-इनपुट कंपनियों पर दबाव

उर्वरक (Fertilizer), कीटनाशक और बीज बनाने वाली कंपनियों के लिए यह चुनौतीपूर्ण समय हो सकता है। बाजार अब इस बात पर नजर टिकाए है कि फसल कटाई के दौरान कुल उत्पादन कितना रहता है। आने वाले हफ्तों में सरकारी आंकड़े यह स्पष्ट करेंगे कि शुरुआती कमी के बावजूद क्या देश अपने वार्षिक उत्पादन लक्ष्यों को हासिल कर पाएगा या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.