आयात लागत में उछाल: सब्सिडी बिल पर ₹70,000 करोड़ का अतिरिक्त बोझ
पश्चिम एशिया में चल रहे संकट का सीधा असर भारत के फर्टिलाइजर (खाद) आयात पर पड़ रहा है। इसके चलते यूरिया, डी-अमोनियम फॉस्फेट (DAP) और एनपीके कॉम्प्लेक्स फर्टिलाइजर्स जैसी जरूरी खादों के ग्लोबल दाम आसमान छू रहे हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि इस बढ़ोतरी से फाइनेंशियल ईयर 2026-27 (FY27) के लिए भारत के फर्टिलाइजर सब्सिडी बिल पर ₹70,000 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। ऐसे में, कुल सब्सिडी का अनुमानित खर्च बढ़कर ₹2.41 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है, जो पहले बजट में अनुमानित ₹1.71 लाख करोड़ से काफी ज्यादा है।
खरीफ सीजन के लिए खाद की सप्लाई सुनिश्चित
हालांकि, बढ़ी हुई लागत के बावजूद, सरकारी अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि आने वाले खरीफ एग्रीकल्चरल सीजन के लिए खाद की उपलब्धता पूरी तरह सुरक्षित है। देश में मौजूदा स्टॉक कुल जरूरत का 51% से अधिक बताया जा रहा है। भारत संभावित बाधाओं, जैसे कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे रास्तों से बचने के लिए, आयात स्रोतों में विविधता ला रहा है। वैकल्पिक शिपिंग मार्गों के जरिए 22 लाख टन से अधिक फर्टिलाइजर की खरीद भी सुनिश्चित की जा चुकी है।
घरेलू उत्पादन और खरीद के प्रयास
पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद से, भारत का घरेलू फर्टिलाइजर उत्पादन प्रति दिन लगभग 80,000 टन की रफ्तार से चल रहा है, हालांकि यह पिछले साल की तुलना में थोड़ी कम है। डिपार्टमेंट ऑफ फर्टिलाइजर्स (Department of Fertilizers) आने वाले महीनों में इस कमी को पूरा करने के लिए काम कर रहा है। इसके अलावा, कंसोर्टियम-आधारित खरीद (consortium-based procurement) के माध्यम से डीएपी (DAP) और एनपीके (NPK) कॉम्प्लेक्स फर्टिलाइजर्स की बड़ी मात्रा सुरक्षित की गई है। यूरिया निर्माण के लिए एक महत्वपूर्ण इनपुट, यानी गैस की पर्याप्त सप्लाई भी उपलब्ध बताई जा रही है।