Dairy Export Strategy: AMF के जरिए ग्लोबल मार्केट पर कब्जा करने की तैयारी में भारत

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Dairy Export Strategy: AMF के जरिए ग्लोबल मार्केट पर कब्जा करने की तैयारी में भारत

भारत अब अपने डेयरी एक्सपोर्ट को नई रफ्तार देने के लिए Anhydrous Milk Fat (AMF) पर दांव लगा रहा है। इस स्ट्रैटेजी का मकसद घरेलू सप्लाई को प्रभावित किए बिना वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स का एक्सपोर्ट बढ़ाना है।

दुनिया का सबसे बड़ा मिल्क प्रोड्यूसर होने के बावजूद भारत अपने कुल उत्पादन का 1% से भी कम हिस्सा एक्सपोर्ट करता है। फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में देश का कुल मिल्क प्रोडक्शन 247.87 मिलियन टन रहा। अब डेयरी सेक्टर इस बड़ी खाई को पाटने के लिए एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ रहा है।

AMF क्या है और क्यों है खास?

AMF यानी Anhydrous Milk Fat एक हाई-वैल्यू इंडस्ट्रियल इंग्रेडिएंट है, जिसमें 99.8% से ज्यादा मिल्क फैट होता है। इसका इस्तेमाल बेकरी, कन्फेक्शनरी और इन्फेंट फॉर्मूला बनाने वाली बड़ी ग्लोबल कंपनियां करती हैं। साधारण घी के विपरीत, AMF एक स्टैंडराइज्ड प्रोडक्ट है, जिसके लिए लंबे समय के इंडस्ट्रियल सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट्स किए जा सकते हैं।

बॉन्डेड जोन की गेम-चेंजिंग स्ट्रैटेजी

डेयरी एक्सपोर्ट में सबसे बड़ी चुनौती यह रही है कि बड़े पैमाने पर एक्सपोर्ट करने से घरेलू मार्केट में कीमतों पर दबाव पड़ता है, जिससे सरकार को फूड सिक्योरिटी के लिए पाबंदियां लगानी पड़ती हैं।

इस समस्या को दूर करने के लिए 'बॉन्डेड प्रोसेसिंग जोन' (SEZs) का सहारा लिया जा रहा है। इसमें कंपनियां कच्चा बटरफैट आयात करेंगी, उसे AMF में प्रोसेस करेंगी और फिर री-एक्सपोर्ट कर देंगी। चूंकि यह माल घरेलू बाजार में नहीं जाएगा, इसलिए आम जनता के लिए दूध की उपलब्धता बनी रहेगी।

बाजार के अवसर और निवेश के जोखिम

भारत को खाड़ी देशों और दक्षिण एशिया में लॉजिस्टिक्स का बड़ा फायदा मिलता है। साल 2024 में घी और बटर का एक्सपोर्ट $330 मिलियन तक पहुंच चुका है। इसके अलावा, नाइजीरिया और अल्जीरिया जैसे देशों में डेयरी की भारी डिमांड है।

हालांकि, निवेशकों को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए:

  1. वोलैटिलिटी: AMF की कीमतें ग्लोबल मिल्क प्रोडक्शन साइकल पर निर्भर करती हैं, जिससे मुनाफे में उतार-चढ़ाव आ सकता है।
  2. इंफ्रास्ट्रक्चर: ग्लोबल दिग्गजों को टक्कर देने के लिए कोल्ड-चेन और प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी में भारी निवेश की जरूरत है।
  3. रेगुलेटरी जोखिम: डेयरी एक संवेदनशील कमोडिटी है। अगर घरेलू सप्लाई कम होती है, तो सरकार एक्सपोर्ट पर अचानक पाबंदियां लगा सकती है। निवेशकों को कंपनी की सप्लाई चेन और सरकारी नीतियों के अपडेट्स पर पैनी नजर रखनी चाहिए।
Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.