भारत-ईयू FTA: ऑर्गेनिक सेक्टर में **$60 बिलियन** (₹4.98 लाख करोड़) का सुनहरा मौका, पर सर्टिफिकेशन की अड़चनें!

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AuthorNeha Patil|Published at:
भारत-ईयू FTA: ऑर्गेनिक सेक्टर में **$60 बिलियन** (₹4.98 लाख करोड़) का सुनहरा मौका, पर सर्टिफिकेशन की अड़चनें!
Overview

भारत और यूरोपियन यूनियन (EU) के बीच हाल ही में हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) ने भारतीय ऑर्गेनिक फ़ूड सेक्टर के लिए बड़े मौके खोले हैं। उम्मीद है कि यह समझौता भारतीय ऑर्गेनिक उत्पादों के एक्सपोर्टर्स के लिए **$60 बिलियन** (लगभग ₹4.98 लाख करोड़) का बाज़ार खोल सकता है। BIOFACH 2026 में भारत को 'कंट्री ऑफ द ईयर' चुना जाना इस सेक्टर के लिए एक बड़ा बूस्ट है। हालांकि, सर्टिफिकेशन के जटिल नियम और रेगुलेटरी कंप्लायंस जैसी चुनौतियाँ अभी भी एक बड़ी अड़चन बनी हुई हैं।

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FTA से ऑर्गेनिक एक्सपोर्ट में ₹4.8 लाख करोड़ के मौके

भारत और यूरोपियन यूनियन (EU) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर बातचीत का सफल समापन भारतीय ऑर्गेनिक फ़ूड सेक्टर के लिए एक बड़ी खुशखबरी लेकर आया है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि इस समझौते से भारतीय ऑर्गेनिक एक्सपोर्टर्स के लिए $60 बिलियन (लगभग ₹4.98 लाख करोड़) की भारी-भरकम बाज़ार की संभावनाएँ खुल सकती हैं। लगभग दो दशक की बातचीत के बाद अंतिम रूप दिए गए इस ऐतिहासिक समझौते से कई तरह के सामानों पर इम्पोर्ट ड्यूटी कम या खत्म हो जाएगी, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।

इस डेवलपमेंट का महत्व न्यूरेंबर्ग, जर्मनी में चल रहे BIOFACH 2026, जो ऑर्गेनिक फूड का दुनिया का सबसे बड़ा ट्रेड फेयर है, में और भी बढ़ गया। इस इवेंट में भारत को "कंट्री ऑफ द ईयर" का दर्जा मिलना, ऑर्गेनिक प्रोडक्ट्स के ग्लोबल सप्लायर के तौर पर भारत की बढ़ती अहमियत को दर्शाता है। 2,200 एग्जीबिटर्स में 100 से ज़्यादा भारतीय कंपनियाँ शामिल थीं, जिन्होंने देश की कृषि विविधता और अंतर्राष्ट्रीय मांग को पूरा करने की तत्परता दिखाई। APEDA के चेयरमैन अभिषेक देव ने "दोनों पक्षों के लिए बड़े अवसरों" की बात कही और इस फेयर को भारत के ऑर्गेनिक प्रोडक्ट्स और साझेदारी की क्षमता दिखाने का एक अहम मंच बताया। बता दें कि फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में भारत का ऑर्गेनिक फूड एक्सपोर्ट पहले ही $665.96 मिलियन के आंकड़े को छू चुका है, जो पिछले साल के मुकाबले 34.6% की जबरदस्त बढ़ोतरी है।

ग्लोबल ट्रेंड्स और भारत का एक्सपोर्ट परफॉरमेंस

दुनिया भर में ऑर्गेनिक फ़ूड मार्केट में लगातार तेज़ी देखी जा रही है। अनुमान है कि 2026 तक यह बाज़ार करीब $185 बिलियन का हो जाएगा और 2034 तक $700 बिलियन से भी ऊपर पहुँच सकता है। इस ग्रोथ का बड़ा कारण हेल्थ, सस्टेनेबिलिटी और केमिकल-फ्री प्रोडक्ट्स के प्रति बढ़ती कंज्यूमर अवेयरनेस है। एशिया-पैसिफिक इस मार्केट में सबसे तेज़ी से बढ़ते क्षेत्रों में से एक है।

भारत के ऑर्गेनिक एक्सपोर्ट परफॉरमेंस ने भी उम्मीद जगाई है, जिसमें 2024-25 में खास उछाल देखा गया। ऑर्गेनिक अनाज, प्रोसेस्ड फूड्स और औषधीय पौधों जैसी कैटेगरीज में एक्सपोर्ट वैल्यू में काफी बढ़ोतरी हुई। हालाँकि, हाल के सालों में भारत के ऑर्गेनिक एक्सपोर्ट में उतार-चढ़ाव भी देखे गए हैं, 2022-23 और 2023-24 में वॉल्यूम और वैल्यू में कुछ गिरावट के बाद हालिया रिकवरी हुई है। अमेरिका और यूरोपीय यूनियन (EU) भारतीय ऑर्गेनिक प्रोडक्ट्स के मुख्य डेस्टिनेशन बने हुए हैं। EU, खास तौर पर, बड़ा बाज़ार एक्सेस देता है, और FTA से वाइन, स्पिरिट्स और जैतून के तेल जैसे प्रमुख EU एग्री-फूड एक्सपोर्ट्स पर टैरिफ में बड़ी कटौती का वादा है, साथ ही यह भारतीय प्रोडक्ट्स के लिए भी अपना बड़ा कंज्यूमर बेस खोल रहा है। हालांकि, EU अपने सख्त हेल्थ और फ़ूड सेफ्टी स्टैंडर्ड्स को लेकर भी जाना जाता है, जो इम्पोर्ट्स के लिए नॉन-नेगोशिएबल हैं।

सर्टिफिकेशन की 'बेयर केस': असली चुनौतियाँ

वादे तो बड़े हैं, लेकिन कई तरह के नॉन-टैरिफ बैरियर्स (गैर-प्रशुल्क बाधाएं) FTA की पूरी क्षमता को साकार करने में बड़ी रुकावट बन सकते हैं। एक्सपोर्टर्स के लिए सबसे बड़ी चिंता सर्टिफिकेशन की जटिल प्रक्रियाएं और भारत व EU के बीच स्टैंडर्ड्स की सीमित आपसी मान्यता (mutual recognition) है। EU के नियमों के तहत, इम्पोर्टेड ऑर्गेनिक प्रोडक्ट्स को विशेष कानूनी आवश्यकताओं को पूरा करना होता है और मान्यता प्राप्त बॉडीज से सर्टिफाई होना होता है। हालाँकि भारत को EU द्वारा समकक्ष ऑर्गेनिक नियमों वाले तीसरे देश के रूप में मान्यता प्राप्त है, फिर भी लगातार मुद्दे बने हुए हैं। EU द्वारा भारतीय सर्टिफिकेशन बॉडीज की स्वीकार्यता और इसके विपरीत, हमेशा स्मूथ नहीं होती, जिससे एक्सपोर्टर्स के लिए कंप्लायंस कॉस्ट और देरी बढ़ जाती है।

2022 में, कुछ EU-एक्रेडिटेड सर्टिफिकेशन बॉडीज के डीलिस्टिंग (सूची से हटाए जाने) ने कथित तौर पर भारत के प्रोसेस्ड ऑर्गेनिक फ़ूड एक्सपोर्ट्स को प्रभावित किया था। इसके अलावा, कीटनाशकों के लिए EU की सख्त मैक्सिमम रेसिड्यू लिमिट्स (MRLs), साथ ही अन्य सैनिटरी और फाइटोसैनिटरी स्टैंडर्ड्स को अक्सर भारतीय हितधारकों द्वारा व्यापार-प्रतिबंधक (trade-restrictive) माना जाता है। FTA की सफलता इन स्टैंडर्ड्स को हार्मोनiz करने और भारतीय सर्टिफिकेशन प्रक्रियाओं की अधिक स्वीकार्यता सुनिश्चित करने पर टिकी हुई है। इन नॉन-टैरिफ बैरियर्स को दूर करने में विफलता $60 बिलियन के अवसर और वास्तविक व्यापार प्रवाह के बीच एक बड़ी खाई पैदा कर सकती है, जिससे कई भारतीय ऑर्गेनिक प्रोड्यूसर्स को EU के लाभदायक बाज़ार तक पहुँचने में संघर्ष करना पड़ सकता है। कुछ विश्लेषणों में यह भी चेतावनी दी गई है कि FTAs में व्यापक टैरिफ कटौती से ग्लोबल मार्केट की अस्थिरता के प्रति भेद्यता बढ़ सकती है और यह छोटे उत्पादकों को तब तक फायदा नहीं पहुंचा सकता जब तक कि घरेलू सहायता तंत्र मजबूत न हों।

आगे का रास्ता: गैप को भरना

भारत-EU ऑर्गेनिक ट्रेड के भविष्य का रास्ता नियामक भिन्नताओं को दूर करने और आपसी विश्वास को मजबूत करने के लिए निरंतर संवाद से होकर गुजरेगा। भारतीय सरकार कथित तौर पर अंतर्राष्ट्रीय बेंचमार्क को पूरा करने के लिए अपनी ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर और टेस्टिंग लैबोरेटरीज को बेहतर बनाने के लिए कदम उठा रही है। BIOFACH कांग्रेस 2026 का थीम, "ग्रोइंग टुमॉरो: यंग वॉयसेस, बोल्ड विजन" (Growing Tomorrow: Young Voices, Bold Visions), नवाचार और सस्टेनेबल समाधानों पर एक सेक्टर-व्यापी फोकस को उजागर करता है, जिसमें सर्टिफिकेशन को सुव्यवस्थित करने और वैल्यू चेन्स में पारदर्शिता में सुधार के प्रयास शामिल हो सकते हैं। भारतीय एक्सपोर्टर्स के लिए, FTA का लाभ उठाने के लिए इन नियामक जटिलताओं को रणनीतिक रूप से नेविगेट करने, साथ ही EU कंज्यूमर्स द्वारा मांग किए जाने वाले उच्च मानकों को पूरा करने के लिए क्वालिटी एश्योरेंस और ब्रांडिंग में निरंतर निवेश की आवश्यकता होगी।

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