भारत का बड़ा लक्ष्य: 2030 तक 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन!

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AuthorNeha Patil|Published at:
भारत का बड़ा लक्ष्य: 2030 तक 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन!

भारत सरकार अपने नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को तेज़ी से आगे बढ़ा रही है। लक्ष्य है कि 2030 तक सालाना 50 लाख मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन शुरू हो जाए। इस रणनीति से कार्बन उत्सर्जन तो घटेगा ही, साथ ही रिन्यूएबल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश भी बढ़ेगा। देश में पहले से ही 56 सोलर पार्क को मंजूरी मिल चुकी है, जिनमें से करीब 19,000 मेगावॉट की सोलर क्षमता चालू हो चुकी है।

Detailed Coverage

ग्रीन हाइड्रोजन मिशन पर भारत की रफ्तार

भारतीय सरकार ने नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के लिए अपना रोडमैप तैयार कर लिया है। इसके तहत, 2030 तक 50 लाख मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इस पहल का मकसद देश के कार्बन फुटप्रिंट को कम करना और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में नए रोज़गार के अवसर पैदा करना है। इस दिशा में, सरकार क्लीन एनर्जी टेक्नोलॉजी में निवेश को बढ़ावा दे रही है ताकि पारंपरिक जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम हो सके।

सोलर पावर का बढ़ता जाल

हाइड्रोजन के अलावा, भारत अपनी सौर ऊर्जा क्षमता का भी तेजी से विस्तार कर रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 14 राज्यों में 56 सोलर पार्क को मंजूरी दी गई है, जिनकी कुल नियोजित क्षमता 39,461 मेगावॉट है। इसमें से 18,919 मेगावॉट क्षमता पहले से ही चालू है और नेशनल ग्रिड में योगदान दे रही है। रूफटॉप सोलर प्रोग्राम भी 44.5 लाख से ज़्यादा घरों तक पहुंच चुका है, जिससे ऊर्जा उत्पादन का विकेंद्रीकरण हो रहा है और घरों की बिजली लागत कम हो रही है।

कृषि और जलवायु परिवर्तन का असर

हालिया संसदीय अपडेट्स में कृषि क्षेत्र में बदलावों पर भी प्रकाश डाला गया, जहां महिलाएं अब 59.8% कृषि कार्यबल का हिस्सा हैं। इस बदलाव के लिए बेहतर क्रेडिट और बाजार संसाधनों की आवश्यकता है। साथ ही, सरकार बाढ़ प्रबंधन जैसे दीर्घकालिक जलवायु जोखिमों से निपटने पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है। 1986 से 2022 के बीच सैटेलाइट मॉनिटरिंग में 2.1213 करोड़ हेक्टेयर ज़मीन बाढ़ से प्रभावित पाई गई। असम जैसे राज्यों में इसका असर 24.77 लाख हेक्टेयर तक देखा गया। इन पर्यावरणीय वास्तविकताओं के चलते पारंपरिक इलाकों में पानी की अधिक खपत वाली धान की खेती से हटकर नई फसल पैटर्न की ओर नीतिगत बदलाव हो रहे हैं।

इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्री की नई चाल

ऑटोमोबाइल सेक्टर में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बदलाव जारी है, जिसमें 52,718 पब्लिक चार्जिंग स्टेशन चालू हो चुके हैं, जिनमें 16,561 फास्ट चार्जर शामिल हैं। ये इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए हैं। वहीं, औद्योगिक क्षेत्र में, भारत के 35 शिप रीसाइक्लिंग यार्ड ने यूरोपीय संघ की पर्यावरण सर्टिफिकेशन के लिए आवेदन किया है। सरकार इस प्रक्रिया को तेज़ करने पर ज़ोर दे रही है, जिससे वैश्विक बाज़ार में भारतीय शिप-ब्रेकिंग सुविधाओं की प्रतिस्पर्धी स्थिति सुधर सकती है।

निवेशकों को इन विकासों पर नज़र रखनी चाहिए, खासकर मंजूर की गई शेष 20,000 मेगावॉट सोलर क्षमता की कमीशनिंग टाइमलाइन और ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत पायलट प्रोजेक्ट्स की प्रगति पर। सफलता के मुख्य संकेतकों में 2030 के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए उद्योग की उत्पादन क्षमता को बढ़ाना और कृषि उत्पादन पर जलवायु संबंधी व्यवधानों को प्रबंधित करने के वर्तमान उपायों की प्रभावशीलता शामिल होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.