भारत ने इस साल ऑयल पाम (Oil Palm) विस्तार के अपने लक्ष्य का **47%** हिस्सा पूरा कर लिया है, जिसके तहत **55,614 हेक्टेयर** जमीन पर खेती शुरू हो चुकी है। फ्रेश फ्रूट बंच (FFB) की कीमतें बढ़कर **₹20,000 प्रति टन** पहुंचने से किसानों का रुझान इस ओर बढ़ा है।
भारत सरकार अपनी खाद्य तेलों पर निर्भरता कम करने के लिए मिशन मोड में काम कर रही है। इस फाइनेंशियल ईयर में ऑयल पाम की खेती के लिए निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले 55,614 हेक्टेयर का रकबा कवर कर लिया गया है। 2026-27 तक 1.19 लाख हेक्टेयर का नेशनल लक्ष्य हासिल करने के लिए बिहार को भी नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल-ऑयल पाम (NMEO-OP) में शामिल किया गया है।
बढ़ते दाम और सरकारी सपोर्ट
ऑयल पाम की खेती अब किसानों के लिए अधिक मुनाफे वाला सौदा साबित हो रही है। फ्रेश फ्रूट बंच (FFB) के दाम 2023 के ₹12,500 प्रति टन से बढ़कर अब ₹20,000 प्रति टन के स्तर पर पहुंच गए हैं। सरकार की 'वॉयबिलिटी गैप पेमेंट' मैकेनिज्म किसानों को एक निश्चित प्राइस फ्लोर देता है, जो इस फसल की लंबी अवधि यानी करीब 2 दशक की लाइफ को देखते हुए एक बड़ा सुरक्षा कवच है।
प्रोसेसिंग का पेंच
एग्री-प्रोसेसिंग कंपनियों के लिए चुनौती सिर्फ खेती बढ़ाना नहीं, बल्कि प्रोसेसिंग क्षमता का विस्तार भी है। ऑयल पाम के फल बेहद जल्दी खराब होते हैं, जिन्हें हार्वेस्टिंग के 24 घंटे के भीतर क्रूड पाम ऑयल में बदलना जरूरी है। निवेशकों को यह देखना होगा कि कंपनियां किस तरह मिलों की क्षमता और नई खेती के बीच तालमेल बिठाती हैं।
क्षेत्रीय प्रदर्शन और रिस्क
हालांकि राष्ट्रीय आंकड़े बेहतर हैं, लेकिन राज्यों का प्रदर्शन मिला-जुला है। आंध्र प्रदेश, केरल, नागालैंड और मिजोरम फंड के इस्तेमाल में बेहतर रहे हैं, जबकि गुजरात और ओडिशा जैसे राज्यों में रफ्तार थोड़ी धीमी है। चूँकि इस फसल से कमर्शियल पैदावार आने में 3 से 4 साल का समय लगता है, इसलिए इंटरक्रॉपिंग मॉडल की सफलता भी इस क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी।
