National Mission on Edible Oils-Oil Palm के तहत भारत पाम ऑयल की खेती को तेजी से बढ़ा रहा है। Godrej Agrovet और Patanjali Foods जैसी कंपनियां अपनी पहुंच बढ़ा रही हैं, लेकिन **4 साल** का लंबा ग्रोथ साइकिल निवेशकों के लिए चुनौती भी है।
भारत सरकार ने अपने $18.3 बिलियन के भारी-भरकम एडिबल ऑयल इम्पोर्ट बिल को कम करने के लिए 'नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल्स–ऑयल पाम' (NMEO-OP) को रफ्तार दी है। इस मिशन के तहत सरकार मार्केट प्राइस और फिक्स्ड फ्लोर प्राइस के अंतर को कम करने के लिए फाइनेंशियल सपोर्ट दे रही है, ताकि किसानों और कंपनियों के जोखिम को कम किया जा सके। चूंकि पाम के पेड़ को फल देने में 4 साल का समय लगता है, इसलिए यह सरकारी सपोर्ट निवेश को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक अहम कदम है।
कंपनियों का आक्रामक विस्तार
बड़ी एग्री-बिजनेस कंपनियां अब केवल प्रोसेसिंग पर निर्भर न रहकर प्लांटेशन मैनेजमेंट की ओर बढ़ रही हैं। Godrej Agrovet अपने प्लांटेशन को 80,000 हेक्टेयर से बढ़ाकर 150,000 हेक्टेयर करने की योजना बना रही है। वहीं, Patanjali Foods ने 2030 तक 500,000 हेक्टेयर का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। ये कंपनियां स्थानीय नर्सरियों और आधुनिक हार्वेस्टिंग टूल्स में भारी निवेश कर रही हैं।
नॉर्थ-ईस्ट का नया फ्रंटियर
आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बाद अब सरकार का फोकस नॉर्थ-ईस्ट राज्यों जैसे असम, त्रिपुरा और मणिपुर पर है। यहां का लक्ष्य यील्ड को मौजूदा 2.4 टन प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर 5 टन प्रति हेक्टेयर तक ले जाना है। हालांकि, यहां नई प्रोसेसिंग यूनिट्स और बुनियादी ढांचे की कमी एक बड़ी बाधा है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि इस सेक्टर में कैश फ्लो का गैप काफी बड़ा है। पाम ऑयल की कीमतें ग्लोबल मार्केट (खासकर इंडोनेशिया और मलेशिया) के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करती हैं। अगर ग्लोबल लेवल पर दाम गिरते हैं, तो सरकारी मदद के बावजूद कंपनियों की प्रॉफिटेबिलिटी पर दबाव पड़ना तय है। इसके अलावा, छोटे किसानों का इस मिशन को अपनाना और नॉर्थ-ईस्ट की लॉजिस्टिक चुनौतियां भविष्य के लिए बड़े 'मॉनिटरेबल' फैक्टर हैं।
