USDA ने 2026-27 के लिए भारत के मक्का उत्पादन के अनुमान को घटाकर **50 मिलियन टन** कर दिया है। खराब मानसून के चलते इसमें **10%** की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे फूड इन्फ्लेशन और इंडस्ट्रीज पर दबाव बढ़ने का खतरा है।
भारत के कृषि क्षेत्र में आपूर्ति (Supply) को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 2026-27 फाइनेंशियल ईयर में मक्का का कुल उत्पादन पिछले साल के रिकॉर्ड 55 मिलियन टन से घटकर 50 मिलियन टन रहने का अनुमान है। इस 10% की गिरावट के पीछे मुख्य वजह अनिश्चित मानसून है, जिसने बुवाई के समय नमी की कमी पैदा कर दी।
प्रमुख राज्यों पर असर
बारिश की कमी का सीधा असर बुवाई के रकबे (Acreage) पर पड़ा है। कर्नाटक में खेती के क्षेत्र में 26% की कमी आई है, जबकि महाराष्ट्र और तेलंगाना में भी रुझान कमजोर रहे हैं। हालांकि गुजरात और राजस्थान में मामूली बढ़ोतरी हुई, लेकिन दक्षिण भारत में हुई कमी की भरपाई के लिए यह पर्याप्त नहीं है।
बाजार और आर्थिक परिप्रेक्ष्य
दिलचस्प बात यह है कि देश में मक्का की खपत 51 मिलियन टन रहने की उम्मीद है, जो उत्पादन से अधिक है। हालांकि पिछले बंपर हार्वेस्ट के चलते भारी स्टॉक (Carryover stocks) बफर का काम करेंगे, जिससे फिलहाल आपूर्ति की कोई बड़ी दिक्कत नहीं होगी। लेकिन अगर आने वाले समय में पैदावार और प्रभावित होती है, तो यह सुरक्षा कवच कमजोर पड़ सकता है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
मक्का पोल्ट्री, स्टार्च और इथेनॉल इंडस्ट्री के लिए कच्चा माल है। सप्लाई में कमी से इन क्षेत्रों की इनपुट कॉस्ट बढ़ सकती है, जिससे कंपनियों के मार्जिन पर दबाव आ सकता है। साथ ही, कृषि आय में कमी ग्रामीण मांग को प्रभावित कर सकती है, जिसका असर FMCG, ट्रैक्टर और टू-व्हीलर कंपनियों पर दिख सकता है।
इन्वेस्टर्स को अब सरकार के अगले कदमों पर नजर रखनी चाहिए। खाद्य महंगाई को नियंत्रित करने के लिए सरकार स्टॉक लिमिट या एक्सपोर्ट ड्यूटी जैसे कड़े फैसले ले सकती है, जो सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण ट्रिगर साबित होंगे।
