Illegal HTBt Cotton: भारत में अवैध कॉटन खेती का जाल, सीड कंपनियों के मुनाफे पर भारी संकट

AGRICULTURE
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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Illegal HTBt Cotton: भारत में अवैध कॉटन खेती का जाल, सीड कंपनियों के मुनाफे पर भारी संकट

भारत में अब कुल कॉटन खेती के **30%** हिस्से पर अनधिकृत HTBt कॉटन का कब्जा हो चुका है। इस अवैध मार्केट की वैल्यू **₹880 करोड़** तक पहुंच गई है, जिससे वैध सीड कंपनियों की बिक्री में बड़ी गिरावट देखी जा रही है।

साउथ एशिया बायोटेक्नोलॉजी सेंटर की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में अवैध कॉटन सीड्स का कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है। इस इनफॉर्मल सेक्टर की वैल्यू फिलहाल ₹820 करोड़ से ₹880 करोड़ के बीच आंकी गई है। किसान मजदूरी के बढ़ते खर्च से बचने के लिए सरकारी अप्रूवल के बिना इन बीजों को अपना रहे हैं।

क्यों बदल रहे हैं किसान?

इसका सबसे बड़ा कारण आर्थिक है। हाथों से निराई-गुड़ाई कराने का खर्च प्रति एकड़ ₹12,000 से ज्यादा आता है, जबकि इन बीजों के साथ इस्तेमाल होने वाले ग्लाइफोसेट (herbicide) का खर्च मात्र ₹750 से ₹850 प्रति एकड़ ही है। महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के कई जिलों में तो इसका इस्तेमाल 70% से ज्यादा हो गया है।

कंपनियों पर असर और जोखिम

इस अवैध व्यापार का सबसे बुरा असर वैध सीड कंपनियों पर पड़ा है। साल 2022 के बाद से अधिकृत Bollgard-II सीड्स की बिक्री में 22% से अधिक की गिरावट आई है। साथ ही, इन अवैध बीजों में CP4EPSPS और Vip3A जैसे अनअप्रूव्ड जींस पाए गए हैं, जो बायोसेफ्टी के नियमों का पूरी तरह उल्लंघन है।

निवेशकों के लिए यहाँ दो तरह के खतरे हैं:

  1. कंपनियों के मार्केट शेयर में सीधी गिरावट।
  2. सरकार द्वारा सख्त नियामक कार्रवाई, जिससे लीगल मार्केट के कामकाज में भी रुकावट आ सकती है।

फिलहाल, कॉटन की खेती में ग्लाइफोसेट की खपत 26% बढ़कर 35,000 KL के पार पहुंच गई है। अब देखना होगा कि सरकार इस ब्लैक मार्केट को रोकने के लिए क्या कदम उठाती है और कंपनियां अपने खोए हुए मार्केट शेयर को वापस पाने की क्या रणनीति अपनाती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.