HyFarm Foods: यूपी की गर्मी बनी वरदान! फ्रेंच फ्राइज़ हब बनने की तैयारी, कंपनी की सॉलिड स्ट्रैटेजी

AGRICULTURE
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AuthorKaran Malhotra|Published at:
HyFarm Foods: यूपी की गर्मी बनी वरदान! फ्रेंच फ्राइज़ हब बनने की तैयारी, कंपनी की सॉलिड स्ट्रैटेजी
Overview

HyFarm Foods ने उत्तर प्रदेश को अपना फ्रेंच फ्राइज़ प्रोसेसिंग हब बनाने की एक बड़ी रणनीति तैयार की है। कंपनी का मानना है कि वहां के बदलते मौसम से आलू की क्वालिटी बेहतर हो रही है, जो फ्राइज़ बनाने के लिए एकदम सही है। HyFarm अपने 'सीड-टू-शेल्फ' मॉडल पर ज़ोर दे रही है, जिसके तहत वे **90-95%** बीज खुद तैयार करते हैं।

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यूपी का मौसम बना फ्रेंच फ्राइज़ का 'सीक्रेट इंग्रेडिएंट'!

उत्तर प्रदेश, जो पहले से ही आलू उत्पादन के लिए जाना जाता है, अब फ्रेंच फ्राइज़ प्रोसेसिंग का एक बड़ा केंद्र बनने की ओर अग्रसर है। इसका मुख्य श्रेय वहां के बढ़ते तापमान को जाता है, जिससे आलू की क्वालिटी में जबरदस्त सुधार हुआ है। HyFarm Foods, जो HyFun Foods का एग्रीबिजनेस आर्म है, इसी जलवायु परिवर्तन का फायदा उठाने के लिए अपनी रणनीति बना रही है।

HyFarm Foods के CEO Soundarradjane S के अनुसार, बढ़ते तापमान की वजह से उत्तर प्रदेश के आलू में 'सॉलिड पर्सेंटाइल' यानी ड्राई मैटर कंटेंट, जो क्रिस्पी फ्रेंच फ्राइज़ के लिए सबसे ज़रूरी है, 17% से नीचे से बढ़कर 19-20% या उससे भी ज़्यादा हो गया है। इस बदलाव को भुनाने के लिए HyFarm अपनी खरीद ऑपरेशन्स को साल 2028 तक मध्य प्रदेश और साल 2030 तक उत्तर प्रदेश में फैलाने की योजना बना रही है। कंपनी का लक्ष्य साल 2028 तक 10 लाख टन आलू खरीदना है, जो कि फिलहाल गुजरात से 4 लाख टन की खरीद से काफी ज़्यादा है। ये विस्तार HyFarm के खास 'सीड-टू-शेल्फ' मॉडल पर आधारित है, जिसमें वे 90-95% बीज खुद तैयार करते हैं। यह वर्टिकल इंटीग्रेशन सप्लाई चेन की रुकावटों को कम करता है और क्वालिटी पर पूरा कंट्रोल बनाए रखता है।

यह कदम भारत के तेज़ी से बढ़ते फ्रोज़न आलू बाज़ार के लिए बेहद अहम है। साल 2024 में इस बाज़ार का मूल्य लगभग 1.8 बिलियन डॉलर था, और इसके साल 2033 तक 4.3 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। अकेले फ्रेंच फ्राइज़ सेगमेंट की बात करें तो, यह साल 2034 तक 5.72 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है, जिसमें लगभग 10.60% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) देखी जा रही है।

HyFarm की अपनी बीज उत्पादन पर ज़ोर देने की रणनीति, बाज़ार के दूसरे खिलाड़ियों से बिल्कुल अलग है। जहां HyFarm का लक्ष्य 2028 तक 10 लाख टन आलू खरीदना है, वहीं बाज़ार की दिग्गज कंपनी Iscon Balaji Foods, जो वित्त वर्ष 2025 में लगभग ₹1,500 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज कर चुकी है, बाहरी सप्लायर्स से बीज लेती है। Iscon Balaji Foods को हाल ही में जनवरी 2026 में 44.43 मिलियन डॉलर की फंडिंग भी मिली है।

भारतीय बाज़ार में डच सैन्टाना (Dutch Santana) किस्म के बीजों पर ज़्यादा निर्भरता एक बड़ी कमजोरी है। HyFarm इस जोखिम को कम करने के लिए दुनिया भर के ब्रीडर्स के साथ मिलकर काम कर रही है और कुफरी फ्राइसोना (Kufri Frysona) व कुफरी फ्रायोएम (Kufri FryoM) जैसी नई भारतीय किस्मों पर भी रिसर्च कर रही है। भारत में प्रति व्यक्ति आलू की खपत यूरोप के मुकाबले काफी कम है, जिससे घरेलू बाज़ार में बड़े विकास की संभावना है। साथ ही, साल 2025 में फ्रोज़न फ्राइज़ के निर्यात में भी लगभग 45% की सालाना बढ़ोतरी देखी गई।

HyFarm Foods साल 2028 तक अपना IPO (इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग) लाने की भी योजना बना रही है। कंपनी का यह कदम भारतीय फ्रोज़न आलू और फ्रेंच फ्राइज़ सेक्टर के मजबूत विकास की ओर इशारा करता है, जिसकी CAGR 8.9% से 17.00% के बीच रहने का अनुमान है। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में कंपनी का विस्तार, शहरीकरण और बदलती जीवनशैली के कारण बढ़ती घरेलू मांग को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगा।

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