भू-राजनीतिक टेंशन का फर्टिलाइजर सेक्टर पर साया
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जो ईरान और ओमान के बीच एक संकरा जलमार्ग है, दुनिया भर के फर्टिलाइजर ट्रेड के लिए एक महत्वपूर्ण 'चोकपॉइंट' (chokepoint) साबित हो रहा है। अनुमान है कि ग्लोबल फर्टिलाइजर ट्रेड का लगभग 33% हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है, जिसमें यूरिया और डीएपी (DAP) जैसे जरूरी पोषक तत्व शामिल हैं। ऐसे में, किसी भी तरह का व्यवधान भारत के आगामी खरीफ कृषि सीजन के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गया है। यह स्थिति भारत की फर्टिलाइजर आयात पर बढ़ती निर्भरता और सरकार के सब्सिडी बजट पर अतिरिक्त दबाव डाल रही है।
आयात पर निर्भरता और सब्सिडी का बोझ
भारत की फर्टिलाइजर आयात पर निर्भरता लगातार बढ़ रही है। फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के पहले 10 महीनों में, भारत का फर्टिलाइजर आयात 50% तक बढ़ गया, जिसमें यूरिया में 83% और डीएपी में 40% की भारी उछाल देखी गई। यह बढ़ती निर्भरता, घरेलू उत्पादन में गिरावट के साथ मिलकर, एक बड़ी कमजोरी पैदा करती है। यह स्थिति सरकार के सब्सिडी बजट पर भी भारी दबाव डाल रही है। किसानों को किफायती दाम पर फर्टिलाइजर उपलब्ध कराने के लिए सरकार लागत वृद्धि को वहन करने के लिए प्रतिबद्ध है। Rabi सीजन 2025-26 के लिए न्यूट्रिएंट-बेस्ड सब्सिडी (NBS) का बजट ₹379.52 बिलियन रखा गया था, जिसमें डीएपी के लिए एक विशेष अतिरिक्त सब्सिडी भी शामिल थी ताकि आयात लागत बढ़ने के बावजूद इसकी अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) ₹27,000/टन पर स्थिर रहे।
कंपनियों पर असर और वैल्यूएशन
इस तनाव का असर भारतीय फर्टिलाइजर कंपनियों पर भी दिख रहा है। निवेशक इन कंपनियों की सप्लाई चेन पर पड़ने वाले दबाव पर बारीकी से नजर रख रहे हैं।
Coromandel International (मार्केट कैप ~₹65,000-68,751 Cr, P/E ~27-30x) भारत की दूसरी सबसे बड़ी फॉस्फेटिक फर्टिलाइजर कंपनी है। विश्लेषकों ने इसके शेयर के लिए ₹2,600 का टारगेट प्राइस दिया है, जो इसकी बाजार स्थिति और परिचालन क्षमता में विश्वास को दर्शाता है।
Deepak Fertilisers (मार्केट कैप ~₹12,500-12,600 Cr, P/E ~14-39x) टेक्निकल अमोनियम नाइट्रेट (TAN) और नाइट्रिक एसिड में अपनी क्षमता का विस्तार कर रही है। इन परियोजनाओं से फाइनेंशियल ईयर 2027 से प्रदर्शन में सुधार की उम्मीद है।
Deepak Nitrite (मार्केट कैप
₹21,000-21,500 Cr, P/E ~39-40x) का P/E केमिकल इंडस्ट्री के औसत **22x** से काफी ऊपर है, जो इसके वैल्यूएशन पर सवाल खड़े करता है।
भविष्य का दृष्टिकोण
भारत की फर्टिलाइजर आयात पर अत्यधिक निर्भरता, खासकर पोटाश (MOP) के लिए लगभग 100% और डीएपी के लिए 50-60%, इस क्षेत्र को बाहरी झटकों के प्रति अत्यंत संवेदनशील बनाती है। होर्मुज जलमार्ग में कोई भी लंबा व्यवधान तत्काल कमी पैदा कर सकता है, जिससे लागत इतनी बढ़ सकती है कि सब्सिडी उसे संभाल न पाए। सरकार द्वारा किसानों के लिए MRP स्थिर रखने की नीति, वैश्विक मूल्य वृद्धि को सब्सिडी के माध्यम से अवशोषित करके, राष्ट्रीय वित्त पर भारी दबाव डालती है। भविष्य के लिए, विश्लेषकों का मानना है कि Coromandel International जैसी कंपनियां अपनी बाजार स्थिति के कारण अच्छा प्रदर्शन कर सकती हैं। हालांकि, मध्य पूर्व संघर्ष से उत्पन्न अनिश्चितता बनी हुई है। सरकार की सब्सिडी जारी रखने की वित्तीय क्षमता भी इस क्षेत्र की स्थिरता और लाभप्रदता को निर्धारित करने में एक महत्वपूर्ण कारक बनी रहेगी।