Himachal Apple Output: ₹5,000 करोड़ का सेब उद्योग संकट में, उत्पादन में **48%** की भारी गिरावट

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Himachal Apple Output: ₹5,000 करोड़ का सेब उद्योग संकट में, उत्पादन में **48%** की भारी गिरावट

Himachal Pradesh में इस सीजन सेब का उत्पादन **48%** गिर गया है। खराब मौसम के कारण हुई इस गिरावट से **2.5 लाख** परिवारों की आजीविका पर असर पड़ा है, जिसका सीधा असर रिटेल और कोल्ड चेन लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर दिखेगा।

उत्पादन में भारी गिरावट का गणित

हिमाचल प्रदेश का सेब उद्योग इस समय गहरे संकट से गुजर रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल बाजार में 2.18 करोड़ बक्सों की आवक हुई थी, जो इस सीजन घटकर महज 1.15 करोड़ बक्सों पर सिमट गई है। यह ₹5,000 करोड़ की इकॉनमी के लिए एक बड़ा झटका है, जिससे लगभग 2.5 लाख परिवार प्रभावित हो रहे हैं।

क्यों बिगड़े हालात?

इस गिरावट की मुख्य वजह बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और सर्दियों में पर्याप्त ठंड न पड़ना है। कुछ इलाकों में तो उत्पादन 75% तक गिर गया है। किसान पहले ही लेबर, फर्टिलाइजर और पैकेजिंग के महंगे खर्चों से जूझ रहे थे, ऊपर से यह फसल की बर्बादी उनके मार्जिन को पूरी तरह खत्म कर रही है।

सप्लाई चेन और मार्केट पर असर

इसका असर सिर्फ बागों तक सीमित नहीं है। कोल्ड चेन लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और रीफ्रिजेरेटेड ट्रांसपोर्ट कंपनियों के लिए माल की आवक कम होने से बिजनेस मॉडल पर दबाव बढ़ गया है। साथ ही, FMCG और रिटेल कंपनियां जो हिमाचल से सीधे माल खरीदती हैं, उन्हें अब अपनी सोर्सिंग के लिए दूसरे राज्यों की ओर रुख करना पड़ सकता है, जिससे मार्जिन पर असर पड़ना तय है।

सरकारी स्कीम और भविष्य की रणनीति

सरकार की 'Market Intervention Scheme' भी फिलहाल नाकाम दिख रही है। पिछले साल 76,674 मीट्रिक टन की खरीद के मुकाबले इस बार यह आंकड़ा सिर्फ 10,000 मीट्रिक टन पर है। सरकार अब पारंपरिक खेती को छोड़कर 'हाई-डेंसिटी प्लांटेशन' पर जोर दे रही है, ताकि जलवायु परिवर्तन से निपटा जा सके। भविष्य में यह बदलाव कृषि मशीनों और इनपुट्स के डिमांड प्रोफाइल को पूरी तरह बदल सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.