Himachal Apple: मौसम की मार! उत्पादन में **40%** की भारी गिरावट की आशंका

AGRICULTURE
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AuthorAditya Rao|Published at:
Himachal Apple: मौसम की मार! उत्पादन में **40%** की भारी गिरावट की आशंका

हिमाचल प्रदेश की **₹5,000 करोड़** की एप्पल इकोनॉमी इस सीज़न में **40%** उत्पादन घटने से बड़ी मुश्किल में है। बेमौसम बारिश और खराब मौसम के चलते **2.5 लाख** परिवार प्रभावित होंगे, और खेती की लागत बढ़ने से बागवानों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।

हिमाचल का एप्पल बागीचा पड़ा सूखा

हिमाचल प्रदेश का ₹5,000 करोड़ का एप्पल सेक्टर इस साल बड़ी मुसीबत में है। उम्मीद की जा रही है कि इस सीज़न में उत्पादन में करीब 40% की भारी गिरावट आएगी। पिछले साल जहां 6.99 लाख मीट्रिक टन सेब का उत्पादन हुआ था, वहीं इस बार यह घटकर सिर्फ 4.36 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है। इसका मतलब है कि करीब 2.15 करोड़ बॉक्स सेब कम पैदा होंगे, जो राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका है।

खराब मौसम बना बड़ी वजह

राज्य के बागवानी विभाग की मानें तो इस गिरावट की मुख्य वजह सर्दियों में कम बर्फबारी, वसंत ऋतु की अचानक बारिश और तापमान में अनिश्चितता है। इन खराब मौसम के हालात ने राज्य के आठ जिलों में सेब के विकास को बुरी तरह प्रभावित किया है। इन जिलों में करीब 1.16 लाख हेक्टेयर जमीन पर सेब की खेती होती है, जो राज्य के कुल फल उत्पादन क्षेत्र का लगभग 50% है। सिर्फ सेब ही नहीं, खुबानी और चेरी जैसे दूसरे फलों पर भी मौसम की मार पड़ी है। पिछले कुछ सालों में यहां का तापमान 1 से 1.5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ गया है।

किसानों की बढ़ी मुश्किलें

इस धंधे से जुड़े 2.5 लाख परिवार दोहरी मार झेल रहे हैं - एक तरफ उत्पादन कम, तो दूसरी तरफ खेती की लागत आसमान छू रही है। किसानों का कहना है कि कीटनाशक दवाएं और खेती में इस्तेमाल होने वाली मशीनरी जैसी ज़रूरी चीजों की कीमतें बढ़ गई हैं, जिससे उनकी कमाई पर भारी असर पड़ रहा है। खासकर सेब की पारंपरिक किस्मों को खास मौसम की ज़रूरत होती है, जैसे 7 डिग्री सेल्सियस से नीचे 1,200 से 1,600 घंटे का ठंडा मौसम। बदलता मौसम अब खेती के लिए एक बड़ा जोखिम बनता जा रहा है, जिसे संभालना लगातार मुश्किल होता जा रहा है।

सरकार से मदद की गुहार

इन मुश्किलों से निपटने के लिए किसान सरकार से मदद की उम्मीद कर रहे हैं। वे सिंचाई के इंतज़ाम को बेहतर बनाने और फसल बीमा योजनाओं का दायरा बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। किसानों का मानना है कि ये कदम भविष्य में मौसम की वजह से होने वाले नुकसान से उन्हें आर्थिक सुरक्षा दे सकते हैं। अब देखना यह है कि सरकार इन मांगों पर कितना ध्यान देती है और किसानों के लिए क्या कदम उठाती है।

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