Harrisons Malayalam Share Price: CARE Ratings ने बढ़ाई रेटिंग, निवेशकों में खुशी! कंपनी का प्रॉफिट **₹14.90 करोड़** पार

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AuthorNeha Patil|Published at:
Harrisons Malayalam Share Price: CARE Ratings ने बढ़ाई रेटिंग, निवेशकों में खुशी! कंपनी का प्रॉफिट **₹14.90 करोड़** पार
Overview

Harrisons Malayalam Limited (HML) के निवेशकों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी CARE Ratings ने कंपनी के लिए आउटलुक को 'नेगेटिव' से बदलकर 'स्टेबल' कर दिया है। यह अहम कदम कंपनी के फाइनेंशियल ईयर 2025 (FY25) में शानदार प्रॉफिट (Profit) और मजबूत परफॉरमेंस को देखते हुए उठाया गया है।

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क्रेडिट रेटिंग एजेंसी CareEdge (CARE Ratings) ने Harrisons Malayalam Limited (HML) के लॉन्ग-टर्म बैंकिंग फैसिलिटीज के लिए आउटलुक को 'नेगेटिव' से 'स्टेबल' कर दिया है। यह अपग्रेड कंपनी के वित्तीय स्वास्थ्य और ऑपरेशनल परफॉरमेंस में आए बड़े सुधार का संकेत है, जिसका मुख्य कारण कमोडिटी (Commodity) की कीमतों में मजबूती और कंपनी के प्लांटेशन बिजनेस में बेहतर यील्ड (Yield) है।

दमदार वापसी: नंबर्स ने बदली तस्वीर

कंपनी के वित्तीय नंबर्स ने वापसी का एक बड़ा संकेत दिया है। फाइनेंशियल ईयर 2025 (FY25) में, HML ने ₹513.91 करोड़ की कुल ऑपरेटिंग इनकम दर्ज की, जो पिछले साल की तुलना में 5.28% ज्यादा है। सबसे खास बात यह है कि कंपनी ने प्रॉफिट (Profit) में वापसी की है। पिछले फाइनेंशियल ईयर 2024 (FY24) में ₹7.29 करोड़ का घाटा उठाने के बाद, FY25 में ₹14.90 करोड़ का नेट प्रॉफिट (Net Profit) कमाया है।

इसके अलावा, अर्निंग्स बिफोर इंटरेस्ट, टैक्सेस, डेप्रिसिएशन और एमॉर्टाइजेशन (EBITDA), जिसे रिपोर्ट में PBILDT कहा गया है, वह भी FY24 के ₹10.46 करोड़ से बढ़कर FY25 में ₹23.51 करोड़ हो गया है। ऑपरेशनल एफिशिएंसी में सुधार का असर इंटरेस्ट कवरेज रेश्यो (Interest Coverage Ratio) में भी दिखा है, जो FY24 के 0.80x से उछलकर FY25 में 1.80x हो गया है। इसका मतलब है कि कंपनी अब अपने लोन चुकाने में ज्यादा सक्षम है।

कंपनी का कैपिटल स्ट्रक्चर (Capital Structure) भी मजबूत बना हुआ है। 31 मार्च 2025 तक, कंपनी की ओवरऑल गियरिंग (Gearing) 0.67x पर आरामदायक स्थिति में है। भले ही यह बिजनेस लेबर और वर्किंग कैपिटल-इंटेंसिव है, लेकिन उम्मीद के मुताबिक अर्निंग्स और हाल में हुई एक प्रॉपर्टी की बिक्री से मिले ₹9.6 करोड़ ने लिक्विडिटी (Liquidity) को सहारा दिया है। कंपनी ने ₹35 करोड़ का एक नया टर्म लोन (Term Loan) भी सैंक्शन कराया है, जिसका इस्तेमाल कुछ हद तक रीप्लांटेशन (Replantation) और टूरिज्म सेगमेंट (Tourism Segment) में एक्सपेंशन के लिए किया जाएगा।

कमोडिटी की कीमतें और आगे की रणनीति

रेटिंग में इस बदलाव की बड़ी वजह रबर और चाय की कीमतों में लगातार मजबूती और चाय की यील्ड (Yield) में सुधार है। अकेले रबर की बिक्री से HML की FY25 की कुल ऑपरेटिंग इनकम में ₹297 करोड़ का योगदान रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 14.5% की ग्रोथ दिखाता है। हालांकि, ट्री फेलिंग (Tree Felling) से मिली आय ने अस्थायी तौर पर मदद की, लेकिन भविष्य में इस आय के सामान्य होने से रबर सेगमेंट की प्रॉफिटेबिलिटी पर असर पड़ सकता है। कंपनी अपनी रेवेन्यू स्ट्रीम्स (Revenue Streams) को डाइवर्सिफाई (Diversify) करने के लिए टूरिज्म बिजनेस का विस्तार करने की रणनीति पर काम कर रही है।

जोखिम और सेक्टर का परिदृश्य

इन सकारात्मक संकेतों के बावजूद, HML को इंडस्ट्री से जुड़े कुछ जोखिमों का सामना करना पड़ता है। इनमें एग्रो-क्लाइमेटिक (Agro-climatic) उतार-चढ़ाव जो फसल की यील्ड को प्रभावित कर सकते हैं, रबर और चाय जैसी कमोडिटीज़ (Commodities) की प्राइस वोलेटिलिटी (Price Volatility), और रबर प्लांटेशन में मैच्योर एरिया (Mature Area) का कम होना शामिल है। कंपनी का भविष्य इन्हीं कमोडिटी साइकल्स (Commodity Cycles) से जुड़ा रहेगा।

कंपनी के हालिया पब्लिक रिकॉर्ड्स में फ्रॉड (Fraud), सेबी (SEBI) पेनल्टी या बड़े गवर्नेंस (Governance) रेड फ्लैग्स (Red flags) के कोई मामले सामने नहीं आए हैं, जो क्रेडिट रेटिंग में सुधार के लिए एक सकारात्मक बात है।

भारत में प्लांटेशन सेक्टर, जिसमें चाय और रबर शामिल हैं, काफी कॉम्पिटिटिव (Competitive) है। HML को RPG/RP-SG ग्रुप का हिस्सा होने का फायदा मिलता है, लेकिन इसे स्थापित प्लेयर्स से मुकाबला करना पड़ता है। इस सेक्टर की कई कंपनियां यील्ड सुधारने और कमोडिटी प्राइस रिस्क को कम करने के लिए वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स या डाइवर्सिफिकेशन पर फोकस कर रही हैं। HML का हालिया परफॉरमेंस मैनेजमेंट की बेहतर स्ट्रेटेजी को दर्शाता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.