गुजरात सरकार ने **2026-27** के लिए नेचुरल फार्मिंग को बढ़ावा देने हेतु **₹392 करोड़** का बड़ा बजट आवंटित किया है। राज्य में भूजल के गिरते स्तर और जमीन की बिगड़ती सेहत को सुधारने के लिए यह कदम उठाया गया है, हालांकि मौजूदा आंकड़ों और जमीनी हकीकत के बीच अभी भी बड़ा अंतर बना हुआ है।
गुजरात सरकार नेचुरल फार्मिंग की ओर तेजी से कदम बढ़ा रही है। 2026-27 फाइनेंशियल ईयर के लिए आवंटित ₹392 करोड़ का फंड राज्य के कृषि क्षेत्र पर बढ़ते पर्यावरणीय दबाव को कम करने के लिए है। फिलहाल राज्य में इरिगेशन की मांग तय सीमा से 21% अधिक है, जिससे कई इलाकों में भूजल का स्तर लगातार नीचे जा रहा है। भले ही गुजरात की एग्रीकल्चरल ग्रोथ रेट 9% के साथ देश में सबसे बेहतर है, लेकिन अब सरकार का पूरा जोर सस्टेनेबिलिटी पर है।
आंकड़ों का मायाजाल
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 1,376 क्लस्टर्स में नेचुरल फार्मिंग को बढ़ाया जा रहा है और करीब 1.51 लाख किसान इससे जुड़ चुके हैं। हालांकि, असल चुनौती रजिस्ट्रेशन और प्रैक्टिस के बीच है। कई किसान अब भी पूरी तरह से नेचुरल तरीकों को अपनाने के बजाय सिंथेटिक केमिकल पेस्टिसाइड्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। 2015 की ऑर्गेनिक फार्मिंग पॉलिसी की सफलता को परखने के लिए अब यह गैप एक अहम पॉइंट बन गया है।
पॉलिसी में चुनौतियां
'देसी गौ सहाय योजना' जैसी स्कीम्स का लाभ केवल उन्हीं को मिल रहा है जिनके पास जमीन और पशु हैं। इससे बटाईदार किसान और भूमिहीन मजदूर, जो राज्य की खेती का एक बड़ा हिस्सा संभालते हैं, इस दायरे से बाहर हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक नीतियां अधिक समावेशी नहीं होंगी, यह सेक्टर एक 'निश' (niche) बनकर ही रह जाएगा। हालांकि, Dang Adiwasi Khedut Producer Company जैसे कम्युनिटी-लेड मॉडल्स उम्मीद की किरण दिखा रहे हैं।
निवेशकों के लिए संकेत
भविष्य में सरकार इस प्रोड्यूस को मिड-डे मील जैसी पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन स्कीम्स से जोड़ने की तैयारी में है। साथ ही, GIFT City की मौजूदगी राज्य के लिए 'ग्रीन कैपिटल' आकर्षित करने का जरिया बन सकती है। निवेशकों के लिए यह एक बड़ा संकेत है कि लॉन्ग टर्म में एग्रो-केमिकल और फर्टिलाइजर सेक्टर की डिमांड में बदलाव आ सकता है, क्योंकि सरकार अब सस्टेनेबल मॉडल्स को प्राथमिकता दे रही है।
