गुजरात सरकार ने खेड़ा और आनंद जिलों के किसानों को बड़ी राहत देते हुए Kadana Dam से **198 मिलियन क्यूबिक मीटर** पानी छोड़ने का फैसला लिया है। अक्टूबर की शुरुआत में **97%** बारिश की कमी के कारण **80,000 हेक्टेयर** खरीफ फसलें सूखने की कगार पर थीं।
पानी का संकट और सरकारी कदम
गुजरात में अक्टूबर के पहले 10 दिनों में सामान्य बारिश 11 मिमी की तुलना में केवल 0.3 मिमी बारिश दर्ज की गई है। इस 97% की भारी कमी के कारण फसलों पर मंडरा रहे खतरे को देखते हुए प्रशासन ने 5,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का आदेश दिया है। यह कदम 80,000 हेक्टेयर में खड़ी खरीफ फसल को सूखने से बचाने के लिए उठाया गया है।
खेती पर असर और आर्थिक प्रभाव
यह निर्णय मुख्य रूप से खेड़ा और आनंद जिलों पर केंद्रित है, जो राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। ये जिले राज्य के कुल धान क्षेत्र का लगभग 25% और तंबाकू उत्पादन का 77% हिस्सा हैं। कृषि क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि इस तरह की जलवायु अस्थिरता बीज, उर्वरक और खाद बनाने वाली कंपनियों के लिए सप्लाई चेन में जोखिम बढ़ा सकती है।
भविष्य की चुनौतियां
यह कवायद Narmada और SAUNI Yojana जैसी रणनीतियों का हिस्सा है, जिसके जरिए सरकार पहले भी Devbhumi Dwarka और Jamnagar जैसे क्षेत्रों में पानी की कमी से निपट चुकी है। हालांकि, जल प्रशासन के सामने अब दोहरी चुनौती है—एक तरफ खेती को बचाना और दूसरी तरफ पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करना। यदि बारिश में कमी का दौर जारी रहता है, तो आगे चलकर पानी के बंटवारे को लेकर और कड़े प्रतिबंध लग सकते हैं, जिसका सीधा असर आने वाली रबी सीजन की प्लानिंग पर पड़ेगा।
