केंद्र सरकार अब वेटरनरी कॉलेज और इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के लिए प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा दे रही है। देश में लगभग **41,000** वेटरनरी संस्थानों की कमी को पूरा करने के लिए यह कदम उठाया गया है, लेकिन निवेशकों को फीड की बढ़ती कीमतों और क्वालिटी मानकों को लेकर सतर्क रहना होगा।
शिक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर
डिपार्टमेंट ऑफ एनिमल हसबेंडरी एंड डेयरी (Department of Animal Husbandry and Dairying) एक नई स्कीम तैयार कर रहा है। इसके जरिए प्राइवेट कंपनियों को वेटरनरी कॉलेज, डायग्नोस्टिक लैब और एनिमल हॉस्पिटल खोलने के लिए इन्सेंटिव दिए जाएंगे। यह नीति इसलिए भी अहम है क्योंकि भारत का लाइवस्टॉक सेक्टर लगातार जीडीपी ग्रोथ से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है।
NITI Aayog की रिपोर्ट और लक्ष्य
NITI Aayog के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में नेशनल सर्विस नॉर्म्स के हिसाब से 41,000 वेटरनरी संस्थानों की भारी कमी है। सरकार का लक्ष्य वेटरनरी प्रोफेशनल्स की संख्या को 20,000 के पार ले जाना है, ताकि पशु स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हो सके और खेती से जुड़े इस व्यवसाय को कमर्शियल मॉडल में बदला जा सके।
सेक्टर के सामने चुनौतियां
विकास की संभावनाओं के बीच कुछ बड़ी अड़चनें भी हैं। CLFMA of India जैसे स्टेकहोल्डर्स का कहना है कि फीड की कीमतों में उतार-चढ़ाव एक बड़ी चुनौती है। मक्का और सोयाबीन, जो पोल्ट्री फीड का करीब 55% हिस्सा होते हैं, उनकी कमी के कारण मुनाफा प्रभावित हो रहा है। सालाना 3.5 मिलियन टन पोल्ट्री फीड की मांग बढ़ने से कच्चे माल की कीमतों का दबाव बना हुआ है।
रिस्क फैक्टर और विवाद
प्राइवेट कॉलेज खोलने की राह आसान नहीं है। तमिलनाडु जैसे राज्यों में इसे लेकर विरोध हुआ है। प्रोफेशनल बॉडीज को डर है कि प्राइवेट एंट्री से कहीं एजुकेशन की क्वालिटी और स्टैंडर्ड्स के साथ समझौता न हो जाए। निवेशकों को यह देखना होगा कि सरकार कैसे क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी और कॉलेज अप्रूवल की प्रक्रिया को लागू करती है, क्योंकि इसी पर सेक्टर का भविष्य टिका है।
