सरकार ने चीनी सेक्टर में सुधार के लिए रमेश चंद की अध्यक्षता में **5** सदस्यों की एक कमेटी का गठन किया है। यह पैनल चीनी की एमएसपी (MSP) और मिलों की वित्तीय सेहत के बीच के बड़े अंतर को सुलझाने पर काम करेगा, जिसका सीधा असर शुगर कंपनियों के प्रॉफिट पर पड़ सकता है।
केंद्र सरकार ने नीति आयोग के पूर्व सदस्य रमेश चंद की अगुवाई में यह विशेष कमेटी बनाई है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य किसानों की आय और शुगर मिलों के आर्थिक स्थायित्व के बीच एक संतुलन बनाना है। पिछले कई सालों से मिलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती एफआरपी (FRP) के रूप में किसानों को किए जाने वाले भुगतान और सरकार द्वारा तय एमएसपी के बीच का फासला है।
क्यों है यह रिव्यू जरूरी?
चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) 2018-19 सीजन से ₹31 प्रति किलोग्राम पर ही अटका हुआ है। वहीं, सरकार लगातार किसानों को दिए जाने वाले एफआरपी में बढ़ोतरी करती रही है। इस असंतुलन के कारण मिलों के प्रॉफिट मार्जिन पर बुरा असर पड़ा है और कर्ज का बोझ भी बढ़ गया है।
निवेशकों के लिए संकेत
यह खबर Balrampur Chini Mills, Triveni Engineering और EID Parry जैसे प्रमुख प्लेयर्स के लिए काफी महत्वपूर्ण है। अभी तक ये कंपनियां अपने मुनाफे को बनाए रखने के लिए इथेनॉल जैसे बाई-प्रोडक्ट्स पर निर्भर थीं। यदि एमएसपी में बढ़ोतरी होती है, तो इन कंपनियों की बैलेंस शीट में सुधार की गुंजाइश बनेगी।
कमेटी गन्ने के वजन की माप और मैकेनिकल कटिंग जैसी परिचालन संबंधी समस्याओं पर भी विचार करेगी, जो अक्सर किसानों और मिलों के बीच विवाद का कारण बनती हैं। हालांकि, सरकारी नीति हमेशा उपभोक्ता महंगाई और औद्योगिक सेहत के बीच फंसी रहती है, इसलिए निवेशकों को कमेटी की रिपोर्ट आने तक सतर्क रहना चाहिए।
