प्याज के भावों में 45% का उछाल! सरकार ने शुरू की 'कंडा एक्सप्रेस'

AGRICULTURE
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AuthorAditya Rao|Published at:
प्याज के भावों में 45% का उछाल! सरकार ने शुरू की 'कंडा एक्सप्रेस'

प्याज की बढ़ती कीमतों से आम आदमी परेशान है। रिटेल में प्याज के दाम साल भर पहले के मुकाबले **45%** बढ़कर **₹42/किलो** तक पहुंच गए हैं। इसी बीच, सरकार ने इसे काबू करने के लिए एक खास कदम उठाया है। सोमवार से 'कंडा एक्सप्रेस' नाम की विशेष रेल सेवा फिर से शुरू की जा रही है, जिससे प्याज के बफर स्टॉक को नासिक से बड़े शहरों तक पहुंचाया जाएगा। दिल्ली जैसे शहरों में प्याज **₹65/किलो** तक बिक रहा है।

'कंडा एक्सप्रेस' का मकसद

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, इस रेल सेवा का मुख्य उद्देश्य प्याज की सप्लाई चेन को मजबूत करना है ताकि कीमतें नियंत्रण में रहें। महाराष्ट्र, जो भारत का सबसे बड़ा प्याज उत्पादक राज्य है, वहां खरीफ प्याज उत्पादन में 5% से 7% की गिरावट की आशंका जताई जा रही है। यही सप्लाई की कमी कीमतों में उछाल का मुख्य कारण है।

किसानों को मिल रहे बेहतर दाम

सप्लाई को बढ़ाने और किसानों को प्रोत्साहन देने के लिए, नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (NAFED) और नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन (NCCF) ने प्याज की खरीद दर को बढ़ाकर ₹2,645 प्रति क्विंटल कर दिया है, जो मई में ₹1,270 प्रति क्विंटल था।

महंगाई पर असर

प्याज के दामों में यह बढ़ोतरी सिर्फ एक घटना नहीं है, बल्कि खाने-पीने की जरूरी चीजों के महंगे होने की एक बड़ी तस्वीर का हिस्सा है। चीनी की खुदरा कीमतें भी बढ़ रही हैं और देशभर में औसतन ₹62.5 प्रति किलो बिक रही है, जो पिछले साल के मुकाबले 34% ज्यादा है।

'कंडा एक्सप्रेस' का मकसद सप्लाई चेन को सुचारू बनाना और व्यापारियों द्वारा जमाखोरी को रोकना है। सरकार का कहना है कि उनके पास आने वाले महीनों की मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त बफर स्टॉक है। हालांकि, अगर फूड इन्फ्लेशन जारी रहता है या उत्पादन अनुमान से कम रहता है, तो सरकार को और भी कदम उठाने पड़ सकते हैं।

निवेशकों के लिए खास बातें

जो निवेशक फूड इन्फ्लेशन पर नजर रखते हैं, उनके लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या ये लॉजिस्टिक उपाय खुदरा कीमतों को कम करने में सफल होते हैं। कृषि क्षेत्र में सप्लाई की समस्या अक्सर फूड प्रोसेसिंग कंपनियों और रेस्टोरेंट चेन के मुनाफे पर असर डालती है, क्योंकि उन्हें कच्चे माल की बढ़ती लागत का सामना करना पड़ता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.