सरकार ने खाने वाले तेल की महंगाई को काबू करने के लिए पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल पर इंपोर्ट ड्यूटी घटा दी है। अगस्त में एडिबल ऑयल का रिटेल इंफ्लेशन **14.24%** तक पहुंच गया था। इसके साथ ही, किसानों को राहत देने के लिए सरकार ने PM-AASHA स्कीम में भी बड़े बदलाव किए हैं।
महंगाई को नियंत्रित करने और किसानों को सही दाम दिलाने के लिए सरकार ने एक साथ दो मोर्चों पर काम शुरू किया है। अगस्त के आंकड़ों के मुताबिक एडिबल ऑयल की महंगाई दर 14.24% पर थी, जिसे देखते हुए सरकार ने पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी को कम या खत्म करने का कदम उठाया है। चूंकि भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग 55% तेल आयात करता है, इसलिए यह फैसला इंटरनेशनल कीमतों के असर को कम करने में मददगार साबित होगा।
निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?
यह बदलाव सीधे तौर पर FMCG और एडिबल ऑयल मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के कॉस्ट स्ट्रक्चर पर असर डालेगा। इंपोर्ट ड्यूटी घटने से कच्चा माल सस्ता होगा, जिससे कंपनियों का मुनाफा बढ़ सकता है। अब देखना यह होगा कि कंपनियां इस बचत का फायदा खुद रखेंगी या कीमतों में कटौती करके सेल्स वॉल्यूम बढ़ाने पर जोर देंगी। निवेशकों को अगले कुछ क्वार्टर्स में कंपनियों के इन्वेंट्री मैनेजमेंट और मार्जिन पर कड़ी नजर रखनी चाहिए।
किसानों के लिए क्या बदला?
सरकार ने PM-AASHA स्कीम की प्रक्रिया को आसान बना दिया है। पहले NAFED और NCCF जैसी सरकारी एजेंसियों को सरकारी खरीद शुरू करने के लिए राज्य सरकारों के आदेश का इंतजार करना पड़ता था, जिससे देरी होती थी। अब ये एजेंसियां मंडी में भाव MSP से नीचे जाते ही तुरंत खरीद शुरू कर सकेंगी।
उदाहरण के तौर पर, राजस्थान में हालिया खरीफ फसल के दौरान मूंग के दाम MSP (₹8,780 प्रति क्विंटल) से लगभग 15% नीचे चल रहे थे। इस नई व्यवस्था से किसानों की मजबूरी में फसल बेचने (Distress selling) की नौबत नहीं आएगी। बाजार के जानकारों का मानना है कि NAFED और NCCF की खरीद की गति ही तय करेगी कि ग्रामीण इलाकों में लिक्विडिटी कितनी तेजी से बढ़ती है।
