सरकार ने सरसों (rapeseed and mustard) के लिए मिनिमम सपोर्ट प्राइस (MSP) में **₹413** प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की है, जिससे अब यह **₹6,613** हो गया है। इस कदम का मकसद खेती को बढ़ावा देना और एडिबल ऑयल के आयात पर निर्भरता कम करना है।
भारत सरकार ने आगामी 2027-28 सीजन के लिए सरसों के MSP में बड़ी बढ़ोतरी का ऐलान किया है। ₹6,613 का यह नया भाव किसानों के लिए एक मजबूत आर्थिक सुरक्षा कवच का काम करेगा। ₹413 की यह बढ़ोतरी सीधे तौर पर किसानों को ज्यादा ऑयलसीड्स उगाने के लिए प्रोत्साहित करने की एक बड़ी रणनीति है, ताकि देश की एडिबल ऑयल के आयात पर निर्भरता को कम किया जा सके।\n\n### इंडस्ट्री पर क्या होगा असर?\n\nSolvent Extractors' Association of India (SEA) ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। इंडस्ट्री जानकारों का मानना है कि अगर लोकल प्रोडक्शन बढ़ता है, तो एडिबल ऑयल प्रोसेसिंग कंपनियों के लिए कच्चे माल की सप्लाई स्थिर हो जाएगी। इससे कंपनियों को ग्लोबल मार्केट की अस्थिरता और महंगे इंपोर्ट पर कम निर्भर रहना पड़ेगा, जिससे उनके प्रॉफिट मार्जिन को सुरक्षा मिल सकती है।\n\n### क्या केवल MSP बढ़ाने से काम चलेगा?\n\nएक्सपर्ट्स का मानना है कि केवल MSP का बढ़ना काफी नहीं है। अगर सरकारी खरीद केंद्रों (procurement infrastructure) का जाल मजबूत नहीं हुआ, तो किसानों को सही कीमत नहीं मिल पाएगी। अप्रैल से जुलाई 2026-27 के आंकड़ों पर नजर डालें, तो भारत ने 6.75 लाख टन ऑयलसीड्स इंपोर्ट किए, जिनकी वैल्यू ₹3,733.55 करोड़ रही, जबकि एक्सपोर्ट मात्र 2.64 लाख टन ही रहा।\n\nअब निवेशकों को यह देखना होगा कि इस सीजन में सरसों की बुवाई का कुल रकबा (acreage) कितना रहता है और सरकारी खरीद तंत्र कितनी तेजी से काम करता है। यही फैक्टर्स एडिबल ऑयल कंपनियों की भविष्य की कमाई की दिशा तय करेंगे।
