Seeds Bill 2025: सरकार ने बढ़ाया विचार-विमर्श का दायरा, 18,000 सुझावों के बाद अब क्या होगा अगला कदम?

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AuthorAditya Rao|Published at:
Seeds Bill 2025: सरकार ने बढ़ाया विचार-विमर्श का दायरा, 18,000 सुझावों के बाद अब क्या होगा अगला कदम?

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 'Seeds Bill 2025' को लेकर एक बार फिर चर्चा शुरू कर दी है। सरकार को अब तक **18,000** सुझाव मिल चुके हैं। हालांकि, इस बिल के संसद में आने की कोई निश्चित समयसीमा अभी तय नहीं है, लेकिन जीएम (GM) सीड पॉलिसी और कड़े नियमों के चलते निवेशकों की नजरें इस पर टिकी हैं।

कृषि मंत्रालय ने 'Seeds Bill 2025' को लेकर परामर्श का नया दौर शुरू कर दिया है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 10 सितंबर 2026 को 20 से अधिक किसान संगठनों के साथ प्रस्तावित बदलावों पर बैठक की। यह कदम नवंबर 2025 में ड्राफ्ट आने के बाद मिले 18,000 सुझावों के बाद उठाया गया है।

1966 के एक्ट का आधुनिकीकरण

यह प्रस्तावित कानून 1966 के पुराने सीड्स एक्ट और 1983 के 'सीड्स (कंट्रोल) ऑर्डर' की जगह लेगा। सरकार का मकसद खेती के आधुनिक दौर में गुणवत्तापूर्ण बीज सुनिश्चित करना है। इसके लिए सभी बीज किस्मों का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन और 'SATHI' पोर्टल के जरिए डिजिटल ट्रेसिबिलिटी लागू की जाएगी।

इंडस्ट्री के लिए क्या हैं चुनौतियां?

नियम तोड़ने पर सरकार ने जुर्माने को काफी सख्त कर दिया है। नकली बीज बेचने पर ₹30 लाख तक का जुर्माना और जेल तक का प्रावधान है। जहां यह कदम असंगठित और नकली बीज बेचने वालों को बाहर करेगा, वहीं नामी कंपनियों के लिए कंप्लायंस का बोझ और अधिक बढ़ जाएगा।

विवाद के मुख्य बिंदु

बिल पर सबसे बड़ी बहस जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) तकनीकों को लेकर है। किसान संगठन ट्रांसजेनिक बीजों के समावेश का विरोध कर रहे हैं, जबकि वैज्ञानिक और इंडस्ट्री विशेषज्ञ इसे पैदावार बढ़ाने और इंपोर्ट घटाने के लिए जरूरी मान रहे हैं।

निवेशकों के लिए अहम संकेत

बिल में बीज खराब होने की स्थिति में मुआवजे के सीधे प्रावधानों की कमी है, जिसके लिए किसानों को कंज्यूमर फोरम का सहारा लेना पड़ सकता है। इसके अलावा, बीजों की कीमतों को बाजार के भरोसे छोड़ने की नीति सीधे तौर पर मैन्युफैक्चरर्स के रेवेन्यू मॉडल को प्रभावित करेगी। निवेशकों को सलाह है कि वे आगामी संसदीय सत्रों पर नजर रखें, क्योंकि जीएम सीड्स की पॉलिसी में बदलाव सीधे तौर पर कंपनियों के रिसर्च और फ्यूचर पाइपलाइन को प्रभावित करेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.