केंद्र सरकार ने धान की खेती में कमी को देखते हुए 2026-27 सीजन के लिए धान खरीद का लक्ष्य **708.64 लाख मीट्रिक टन (LMT)** तय किया है। इसके साथ ही PMGKAY के तहत क्वालिटी के नए और सख्त नियम लागू किए गए हैं, जो एग्री-सेक्टर के लिए बड़े बदलाव लेकर आएंगे।
उत्पादन में कमी का असर
सरकार ने 2026-27 खरीफ मार्केटिंग सीजन के लिए धान खरीद का लक्ष्य 708.64 LMT निर्धारित किया है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, धान की बुआई का रकबा 31 अगस्त तक घटकर 414.10 लाख हेक्टेयर रह गया है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 428.46 लाख हेक्टेयर था। बुआई में आई इस गिरावट के कारण ही खरीद के लक्ष्य में कटौती की गई है।
बदले क्वालिटी के नियम
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के तहत सरकार ने खाद्यान्न की गुणवत्ता सुधारने के लिए सख्त नियम बनाए हैं। अब रॉ राइस में टूटे हुए अनाज (broken grain) की सीमा 25% से घटाकर 10% और परबॉइल्ड राइस में 16% से घटाकर 5% कर दी गई है। इस बदलाव से राइस मिलर्स के लिए परिचालन चुनौतियां बढ़ सकती हैं, क्योंकि उन्हें अपने प्लांट और मशीनरी को अपग्रेड करने के लिए भारी कैपिटल खर्च (Capital Spending) करना पड़ सकता है।
स्टोरेज और डिजिटल निगरानी पर जोर
सरकार ने 131 LMT अतिरिक्त स्टोरेज क्षमता बनाने की योजना शुरू की है, जिसमें 111 LMT राज्यों द्वारा और शेष FCI द्वारा योगदान दिया जाएगा। साथ ही, डिजिटल मॉनिटरिंग को बढ़ावा देने के लिए सभी वेयरहाउस को 'डिपो दर्पण' (Depot Darpan) पोर्टल से जोड़ा जाएगा। दिसंबर 2026 तक अनाज के परिवहन के लिए व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम (VLTS) को भी अनिवार्य कर दिया गया है।
निवेशकों के लिए संकेत
एग्री-वैल्यू चेन में हो रहे ये बदलाव निवेशकों के लिए मिला-जुला संकेत हैं। जहां मिलर्स के लिए मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है, वहीं वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स कंपनियों के लिए 131 LMT की नई क्षमता का निर्माण एक सपोर्टिव फैक्टर है। अब बाजार की नजर इस बात पर होगी कि मिलर्स इन नए क्वालिटी नियमों के अनुकूल खुद को कितनी जल्दी ढाल पाते हैं।
