Gourmet Popcornica ने अपने कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग मॉडल को **40,000** एकड़ तक बढ़ा लिया है। पिछले एक दशक में कंपनी ने घरेलू उत्पादन को **15,000** टन से बढ़ाकर **85,000** टन कर दिया है, जिससे मक्के के आयात पर भारत की निर्भरता काफी कम हुई है।
भारतीय बाजार में मक्के की सप्लाई चेन को पूरी तरह बदलने के बाद, Gourmet Popcornica अब अपने कारोबार का दायरा और बढ़ा रही है। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ में 17,800 से ज्यादा किसानों के साथ मिलकर कंपनी ने न केवल उत्पादन में 5.6 गुना उछाल दर्ज किया है, बल्कि आयात पर 70% तक की निर्भरता को भी चुनौती दी है।
तकनीक और आत्मनिर्भरता
कंपनी ने बीज से लेकर अंतिम उपभोक्ता तक पूरी सप्लाई चेन पर नियंत्रण रखा है। स्वदेशी नॉन-जीएमओ (non-GMO) पॉपकॉर्न हाइब्रिड विकसित करने के बाद कंपनी ने बीज आयात की जरूरत खत्म कर दी है। साथ ही, किसानों को उर्वरक और ड्रोन व हार्वेस्टर जैसी आधुनिक मशीनरी पर इंटरेस्ट-फ्री क्रेडिट जैसी सुविधाएं भी दी जा रही हैं।
विविधीकरण और भविष्य की राह
अब कंपनी अपनी होल्डिंग फर्म 'Sarvesai Edible Oils' के जरिए अन्य क्षेत्रों में कदम रख रही है। इसके तहत 2027 तक डेंट कॉर्न और सरसों के बीज के कमर्शियल लॉन्च की तैयारी है। वहीं, ओडिशा और आंध्र प्रदेश में ऑयल पाम की खेती के लिए बड़े पैमाने पर जमीन सुरक्षित की गई है।
कंपनी 2028 तक साउथ-ईस्ट एशियाई देशों में एक्सपोर्ट बाजार में प्रवेश करने का लक्ष्य बना रही है। हालांकि, निवेशकों को इस बात का ध्यान रखना होगा कि एग्री-बिजनेस होने के नाते यह मॉडल मौसम के उतार-चढ़ाव, सरकारी नीतियों और ग्लोबल कमोडिटी कीमतों के जोखिमों से सीधे जुड़ा हुआ है।
