रिकॉर्डतोड़ कमाई के पीछे के राज
GAVL का यह शानदार प्रदर्शन मुख्य रूप से उसके दो मजबूत सेगमेंट्स - ऑयल पाम (Oil Palm) और एनिमल न्यूट्रिशन (Animal Nutrition) - की वजह से संभव हुआ है। ऑयल पाम बिजनेस में सेगमेंट प्रॉफिट में करीब 68% की जबरदस्त उछाल देखने को मिली, जो बढ़कर ₹384 करोड़ हो गया। इसके पीछे डबल-डिजिट वॉल्यूम ग्रोथ, बेहतर ऑयल एक्सट्रैक्शन रेट और पाम कर्नेल ऑयल की कीमतों में 46.7% की बड़ी बढ़ोतरी (₹2,14,754 प्रति मीट्रिक टन) रही।
वहीं, कंपनी के सबसे बड़े रेवेन्यू कंट्रीब्यूटर, एनिमल न्यूट्रिशन सेगमेंट का प्रॉफिट 19.3% बढ़कर ₹347 करोड़ तक पहुंच गया। इसका मुख्य कारण 12% की ओवरऑल वॉल्यूम ग्रोथ रही, खासकर कैटल फीड (cattle feed) में। यह भारत में एनिमल-बेस्ड प्रोटीन और डेयरी की बढ़ती मांग के अनुरूप है।
चुनौतियों का सामना करते हुए क्रॉप केयर और डेयरी
हालांकि, कंपनी के एग्री इनपुट्स डिविजन, खासकर क्रॉप केयर (Crop Care) बिजनेस में गिरावट देखी गई। सेगमेंट प्रॉफिट में 27.2% की भारी गिरावट आई और यह ₹224 करोड़ पर आ गया। इसके लिए खराब मौसम, कम बुवाई, रेगुलेटरी बदलावों और सप्लाई चेन में गड़बड़ी जैसे कारणों को जिम्मेदार ठहराया गया है।
क्रीमलइन डेयरी (Creamline Dairy) सेगमेंट को भी दबाव का सामना करना पड़ा। दूध खरीद की बढ़ती लागतों के मुकाबले रेवेन्यू ग्रोथ कम रहने के कारण EBITDA में 33% की गिरावट आई और यह ₹53 करोड़ रहा। क्रॉप केयर की यह अंडरपरफॉर्मेंस चिंताजनक है, क्योंकि खराब मौसम और रेगुलेटरी अनिश्चितताएं इस सेगमेंट के लिए आगे भी चुनौती बनी रह सकती हैं।
एस्टेक लाइफसाइंसेज में सुधार और ऑपरेशनल मजबूती
GAVL की सब्सिडियरी, एस्टेक लाइफसाइंसेज (Astec LifeSciences) ने पिछले साल के ₹61 करोड़ के EBITDA लॉस से उबरते हुए इस बार करीब ब्रेक-ईवन (break-even) प्रदर्शन किया है। कंपनी का रेवेन्यू 17.5% बढ़कर ₹448 करोड़ हो गया।
इसके अलावा, कंपनी ने अपनी बैलेंस शीट को मजबूत करते हुए नेट वर्किंग कैपिटल (Net Working Capital) को घटाकर 25 दिन कर लिया है, जो पहले 39 दिन था। इससे रिटर्न ऑन कैपिटल एम्प्लॉयड (Return on Capital Employed) बढ़कर 20% हो गया है, जो ऑपरेशनल एफिशिएंसी में सुधार का संकेत देता है।
