Agriculture Sector: खेती में जेंडर गैप से देश को भारी नुकसान, हर साल डूब रहे **₹2 लाख करोड़**

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Agriculture Sector: खेती में जेंडर गैप से देश को भारी नुकसान, हर साल डूब रहे **₹2 लाख करोड़**

भारत की कृषि वर्कफोर्स में **64%** से अधिक महिलाएं हैं, लेकिन जमीन पर उनका मालिकाना हक केवल **11.72%** है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, इस असमानता को दूर करने से देश की इकोनॉमी को सालाना **₹2 लाख करोड़** का बड़ा फायदा हो सकता है।

जमीन और मालिकाना हक का असंतुलन

Arya.ag की एक नई रिपोर्ट ने भारतीय कृषि क्षेत्र की कड़वी सच्चाई सामने रखी है। आज खेतों में काम करने वाले कुल वर्कफोर्स का 64% से अधिक हिस्सा महिलाएं हैं, लेकिन उनके पास खेती योग्य जमीन का केवल 11.72% ही है। यह बुनियादी अंतर ग्रामीण विकास की रफ्तार को धीमा कर रहा है।

आर्थिक नुकसान का गणित

जमीन का मालिक न होने के कारण महिलाओं को बैंक लोन, सरकारी सब्सिडी और अन्य जरूरी सुविधाएं नहीं मिल पातीं। रिपोर्ट का मानना है कि अगर महिलाओं को पुरुषों के बराबर संसाधन और तकनीक मिले, तो फसल की पैदावार में 20% से 30% तक का इजाफा हो सकता है। सही नीतियों के अभाव में देश को सालाना ₹1.2 लाख करोड़ से ₹2 लाख करोड़ तक का आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।

बिना वेतन का काम (Unpaid Labor)

चौंकाने वाली बात यह है कि कृषि क्षेत्र में काम करने वाली आधी महिलाएं 'अनपेड फैमिली हेल्पर' (अवैतनिक पारिवारिक सहायक) के तौर पर गिनी जाती हैं, जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा केवल पांचवां हिस्सा ही है। जमीन का कानूनी हक न होने के कारण ये महिलाएं न तो आधुनिक तकनीक में निवेश कर पाती हैं और न ही बेहतर भंडारण की सुविधा जुटा पाती हैं।

उम्मीद की नई किरण

अब टेक्नोलॉजी और नए फाइनेंशियल मॉडल इस खाई को पाटने का काम कर रहे हैं। 'वेयरहाउस-रिसिप्ट फाइनेंसिंग' जैसे साधन अब किसानों को फसल को कौड़ियों के दाम बेचने से बचा रहे हैं। इसके साथ ही, 'फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन्स' (FPOs) के जरिए महिलाएं अब संगठित होकर बेहतर मोल-भाव कर रही हैं। साथ ही, कृषि ड्रोन चलाने की ट्रेनिंग जैसे कदम ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने की दिशा में बड़े गेम चेंजर साबित हो सकते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.